Sunday, 04 Oct 2026

रेल दुर्घटनाओं में 90 प्रतिशत कमी: अश्विनी वैष्णव

नईदिल्ली (18 मार्च 26)। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में भारतीय रेलवे की प्रगति पर विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि पिछले एक दशक में रेलवे के कामकाज में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने बताया कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में रेलवे ने पारंपरिक राजनीति से हटकर प्रदर्शन आधारित व्यवस्था अपनाई, जिससे वित्तीय स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। रेल मंत्री के अनुसार, हाल के वर्षों में ट्रेन हादसों में लगभग 90 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई है। इसके पीछे आधुनिक तकनीक का उपयोग और सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता देना प्रमुख कारण रहा है। रेलवे ने ट्रैक सुधार, सिग्नलिंग सिस्टम और मॉनिटरिंग में तेजी लाई है।

रेल मंत्री ने बताया कि पहले जहां रेलवे का वार्षिक बजट 24-25 हजार करोड़ रुपये के आसपास रहता था, वहीं अब यह बढ़कर 2.72 लाख करोड़ रुपये हो चुका है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 2.78 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड आवंटन किया गया है, जिससे देशभर में रेल परियोजनाओं को गति मिलेगी। रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार में भी तेजी आई है। 2014 तक जहां कुल 125 किलोमीटर सुरंगें बनी थीं, वहीं इसके बाद 486 किलोमीटर नई सुरंगों का निर्माण किया गया। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए जनरल और स्लीपर कोचों की संख्या बढ़ाई गई है। हाल के वर्षों में हजारों नए कोच जोड़े गए हैं, जिससे आम यात्रियों को राहत मिली है। रेलवे का सबसे बड़ा खर्च कर्मचारियों पर होता है, जिसके बाद ऊर्जा, पेंशन और वित्तीय लागत आती है। हालांकि, विद्युतीकरण के चलते हर साल हजारों करोड़ रुपये की बचत भी हो रही है, जिससे ऑपरेशन अधिक किफायती बन रहा है।

केरल में रेल परियोजनाओं के लिए जमीन की कमी एक बड़ी बाधा बनी हुई है। आवश्यक भूमि का एक छोटा हिस्सा ही अब तक अधिग्रहित किया जा सका है, जिससे कई परियोजनाएं प्रभावित हो रही हैं। बुलेट ट्रेन परियोजनाओं को लेकर भी सरकार सक्रिय है। दिल्ली, वाराणसी, लखनऊ, पटना, मुंबई, पुणे, हैदराबाद और चेन्नई जैसे शहरों को जोड़ने वाली परियोजनाओं पर काम जारी है। इनसे यात्रा का समय काफी कम होने की उम्मीद है। इसके अलावा, आगामी कुंभ मेलों के मद्देनजर रेलवे विशेष तैयारियां कर रहा है, ताकि यात्रियों को बेहतर सुविधा मिल सके। रेल मंत्रालय से जुड़े अनुदान प्रस्तावों पर चर्चा के दौरान विपक्ष द्वारा लाए गए कटौती प्रस्ताव को लोकसभा में ध्वनिमत से खारिज कर दिया गया।

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