गौतमपुरा (22 अक्टूबर 25)। सिर पर साफा, एक हाथ में ढाल और कंधे पर हिंगोट से भरा झोला लटकाए जैसे ही योद्धा मैदान में उतरे, दर्शक रोमांचित हो उठे। पूरा स्टेडियम दर्शकों की तालियो से गूंज उठा। रोमांच से भरे इस खेल के मैदान में दर्शकों की भीड़ थी। जलते हिंगोट से एक-दूसरे पर वार होने लगे और युद्ध शुरू हो गया करीब डेढ़ घंटे चले इस युद्ध में दोनों ओर से आग बरसती रही। गोलियों की तरह चले हिंगोट कभी योद्धाओं के दल से टकराते तो कभी जमीन से टकराकर दर्शकों की ओर रुख कर लेते। लगभग 5 बजे युद्ध प्रारंभ हुआ और यह युद्ध 6:30 बजे बंद हुआ।
हमेशा की तरह इस बार योद्धा सहित वहां उपस्थित दर्शक भी घायल हुए। प्रशासन ने 36 से अधिक घायल होने की पुष्टि की है, जिसमें स्टेडियम की ओर से घायल 20 और बाकी मंच की ओर से घायल थे। अधिकतर का प्राथमिक उपचार करने के बाद छोड़ दिया गया। 6 को अस्पताल पहुंचाया, जिसमें 2 को गंभीर हालत में इंदौर पहुंचाया। परंपरा अनुसार भगवान देवनारायण की पूजा कर ढोल ढमाको के साथ योद्धा नाचते गाते युद्ध मैदान पर पहुंचे सभी योद्धा युद्ध मैदान में तुर्रा और कलंगी नाम के दो दलों में बंट गए और खुशी जाहिर करते हुए हिंगोट आसमान की ओर छोड़ने लगे। जैसे ही योद्धा दो दलों में बटे कुछ ही समय में आसमान की ओर जाने वाले हिंगोट का निशाना अब सामने वाले दल के योद्धा बन गए। पहला हिंगोट गौतमपुरा दल की ओर से रुणजी दल पर गिरा जवाब में दो सरसराते हिंगोट आए और देखते ही देखते पूरे क्षेत्र में हिंगोट युद्ध शुरू हो गया। सरसराते हिंगोट का निशाना कभी जमीन से टकराकर आसमान की ओर रुख कर लेता तो कई बार जलता हिंगोट अपनी दिशा भटककर दर्शकों के बीच में चला जाता। नगर सुरक्षा समिति के सदस्य भी मैदान के अंदर और बाहर पुलिस का सहयोग कर रहे थे।