नईदिल्ली (29 नवंबर 24)। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने बेंगलुरू जेल आतंकी साजिश मामले में एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) से जुड़े भगोड़े सलमान रहमान खान को रवांडा से भारत लाने में सफलता पाई। एनआईए ने यह ऑपरेशन रवांडा जांच ब्यूरो (आरआईबी), इंटरपोल और राष्ट्रीय केंद्रीय ब्यूरो (एनसीबी) के सहयोग से अंजाम दिया। सलमान को 27 नवंबर 2024 को रवांडा की राजधानी किगाली में गिरफ्तार किया गया था। इंटरपोल के रेड नोटिस और बेंगलुरु की विशेष अदालत द्वारा जारी गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) के आधार पर उसे हिरासत में लिया गया। गुरुवार को सलमान को भारत लाया गया। एनआईए ने इस पर बयान देते हुए कहा, 'सलमान का प्रत्यर्पण आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग की बड़ी उपलब्धि है।' सलमान के खिलाफ मामला 2023 में एनआईए ने बेंगलुरु सिटी पुलिस से जांच अपने हाथ में लेने के बाद दर्ज किया था। सलमान पर आरोप है कि उसने आतंकी गतिविधियों के लिए विस्फोटकों की व्यवस्था और आतंकवादी नेटवर्क को समर्थन दिया। एनआईए की जांच में पता चला कि सलमान को बेंगलुरु जेल में कैद आतंकी टी. नसीर ने कट्टरपंथी बनाया था। नसीर पर जेल के भीतर आतंकी भर्ती अभियान चलाने और लश्कर के लिए बड़े साजिशों की योजना बनाने का आरोप है। सलमान 2020 के बाद एनआईए द्वारा प्रत्यर्पित और निर्वासित किए गए 17वें भगोड़े हैं। एनआईए ने इससे पहले भी यूएई, ऑस्ट्रिया और फिलीपींस से खालिस्तानी आतंकियों को भारत लाने में सफलता पाई है। हाल ही में बलजीत सिंह को यूएई से प्रत्यर्पित किया गया था, जबकि खालिस्तान टाइगर फोर्स के कई अन्य आतंकियों को भी भारत लाया गया है।