इंदौर (07 जुलाई 26)। मध्य प्रदेश वक्फ संशोधन अधिनियम-2025 के तहत वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। नए बोर्ड में पहली बार दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल किया गया है, इनमें इंदौर के सामाजिक कार्यकर्ता मनोज मालपानी भी शामिल हैं। नियुक्ति के बाद पहली बार मीडिया से चर्चा करते हुए मालपानी ने कहा कि उनकी प्राथमिकता वक्फ बोर्ड के कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाना और वक्फ संपत्तियों पर कब्जा करने वाले 'वक्फ माफिया' पर प्रभावी कार्रवाई करना होगी, मालपानी ने कहा कि उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी गई है, उसका निर्वहन पूरी निष्ठा और ईमानदारी से करेंगे।
मालपानी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में वक्फ बोर्ड के कामकाज में पहले की तुलना में काफी सुधार आया है, लेकिन सरकार का यह नया फैसला व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी तथा जवाबदेह बनाएगा। उनका मानना है कि बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की मौजूदगी से निर्णय प्रक्रिया में संतुलन और विश्वास बढ़ेगा। बोर्ड में अलग-अलग समुदायों के सदस्यों के बीच तालमेल को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि समाज और दैनिक जीवन में सभी समुदायों के लोग मिलकर काम करते हैं, इसलिए बोर्ड में भी सामंजस्य के साथ जिम्मेदारियों का निर्वहन किया जाएगा।
वक्फ संपत्तियों पर अतिक्रमण के मुद्दे पर मालपानी ने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती 'वक्फ माफिया' है, जो वक्फ की जमीनों और संपत्तियों पर अवैध कब्जे करता है। ऐसे मामलों पर प्रभावी कार्रवाई और निगरानी जरूरी है। उन्होंने वक्फ संपत्तियों के डिजिटल रिकॉर्ड को लेकर भी सरकार की पहल का समर्थन करते हुए कहा कि जब पूरा डिजिटल डाटा तैयार हो जाएगा, तब संपत्तियों की मॉनिटरिंग आसान होगी, विवादित जमीनों की पहचान स्पष्ट होगी और उनके समाधान में भी तेजी आएगी। बतादें कि वक्फ संशोधन अधिनियम-2025 के तहत राज्य वक्फ बोर्ड में कम से कम दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करना अनिवार्य किया गया है। इसी प्रावधान के तहत मध्य प्रदेश ने नया बोर्ड गठित कर देश में इस व्यवस्था को लागू करने वाला पहला राज्य बनने का दावा किया है।