नईदिल्ली (23 मार्च 26)। पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते संघर्ष के बीच नरेंद्र मोदी ने कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय भूमिका निभानी शुरू कर दी है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री इस संकट को लेकर कई देशों के नेताओं से लगातार बातचीत कर रहे हैं, ताकि हालात को बिगड़ने से रोका जा सके।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने जानकारी दी कि ये बातचीत खास तौर पर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को कम करने और क्षेत्र में शांति बनाए रखने पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि फरवरी के अंत से जिस तरह से हालात बिगड़े हैं, उसे देखते हुए भारत लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति से भी बातचीत की। इस दौरान उन्होंने ईद और नवरोज की शुभकामनाएं दीं और उम्मीद जताई कि यह समय क्षेत्र में शांति और स्थिरता लेकर आएगा। साथ ही उन्होंने नागरिक इलाकों और महत्वपूर्ण ढांचों पर हो रहे हमलों को लेकर चिंता जताई और इनकी निंदा की।भारत ने साफ कहा है कि इस तरह के हमले न सिर्फ क्षेत्र के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए खतरा हैं, क्योंकि इससे वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है। खास तौर पर तेल और गैस की सप्लाई पर इसका सीधा असर पड़ता है।
इस पूरे संकट में Strait of Hormuz सबसे अहम बन गया है। यह दुनिया का प्रमुख समुद्री रास्ता है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल गुजरता है। भारत ने जोर देकर कहा है कि इस रास्ते को हर हाल में खुला और सुरक्षित रखा जाना चाहिए, ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित न हो। विदेश मंत्रालय ने यह भी बताया कि भारत के लिए पश्चिम एशिया में रहने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इस मामले में ईरान ने भारत को भरोसा दिलाया है कि वहां मौजूद भारतीयों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएगा।