भोपाल (04 अगस्त 24)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आदिकाल से भारत का अपना विशेष चरित्र और आदर्श संस्कृति रही है, इसलिए भारत विश्व गुरु कहलाया। 'जियो और जीने दो' के सिद्धांत के साथ सभी के कल्याण की कामना हम करते हैं। हमारी व्यवस्था में गुरु की भूमिका अंधकार से प्रकाश की ओर ले जानी वाली रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जीवन में शिक्षा का स्थान सर्वोपरि है। किसी भी पद और हैसियत से अधिक महत्व शिक्षा का है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आज भोपाल के आनंद नगर स्थित टीआईटी एक्सीलेंस कॉलेज में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा आयोजित कार्यशाला में हिस्सा लिया।
अध्यक्ष राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग प्रियंक कानूनगो ने कहा कि शिक्षा पूरी पीढ़ी को बदलने का कार्य करती है। विपरीत परिस्थितियों में रहने वाले बच्चों को मुख्यधारा में लाना महत्वपूर्ण है। श्रम मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि प्रदेश में मजदूरों के हितों का प्राथमिकता के साथ ध्यान रखा जा रहा है। प्रदेश में संचालित आवासीय विद्यालय में पढ़ने वाले वंचित वर्गों के बच्चों को पढ़ाई के लिए सभी संसाधन उपलब्ध कराये जा रहे हैं। कार्यशाला में विषय-विशेषज्ञ और शिक्षा के क्षेत्र के विद्वानों द्वारा शाला त्यागी बच्चों की स्थिति पर चर्चा की गई। साथ ही प्रदेश में स्कूलों से बच्चों के ड्रॉप आउट की प्रवृत्ति को कम करने के संबंध में विचार-विमर्श किया गया। कार्यशाला में अन्य संस्थाओं की भी भागीदारी रही और जनप्रतिनिधि भी शामिल हुए। अध्यक्ष मध्यप्रदेश बाल संरक्षण आयोग द्रविन्द्र मोरे और राष्ट्रीय बाल आयोग की सदस्य सचिव रूपाली बैनर्जी, सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. संजय गोयल, आयुक्त लोक शिक्षण शिल्पा गुप्ता, श्रम आयुक्त धनराजू एस. राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पदाधिकारी, शिक्षा विभाग के अधिकारी और स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।