नईदिल्ली (20 जुलाई 25)। भारत ने अंतरिक्ष की दुनिया में एक और ऐतिहासिक कदम बढ़ाया है। भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने एक्सिओम मिशन-4 (Ax-4) के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की यात्रा की, जिससे वे राकेश शर्मा के बाद अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय बन गए। यह मिशन भारत की मानव अंतरिक्ष उड़ान यात्रा के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है।
39 वर्षीय शुक्ला, एक अनुभवी परीक्षण पायलट हैं और इसरो के गगनयान मिशन के लिए चयनित चार अंतरिक्ष यात्रियों में शामिल हैं। उन्होंने रूस के यूरी गगारिन कॉसमोनॉट ट्रेनिंग सेंटर में कड़ा प्रशिक्षण लिया। इस मिशन के तहत उन्होंने 'मायोजेनेसिस' नामक वैज्ञानिक प्रयोग में भाग लिया, जिसमें सूक्ष्मगुरुत्वाकर्षण (माइक्रोग्रैविटी) में मांसपेशियों के क्षरण का अध्ययन किया गया। इसका मकसद अंतरिक्ष यात्रियों और धरती पर मांसपेशियों से जुड़ी बीमारियों से ग्रस्त मरीजों के लिए उपचार के उपाय खोजना है। अंतरिक्ष से ही ग्रुप कैप्टन शुक्ला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ लाइव बातचीत की और छात्रों के साथ हैम रेडियो के ज़रिए संवाद किया। यह कदम विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) के क्षेत्र में नई पीढ़ी को प्रेरित करने की दिशा में महत्वपूर्ण रहा।
Ax-4 मिशन भारत के पहले स्वदेशी मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ की ओर एक रणनीतिक कदम था, जिसे 2027 में लॉन्च किया जाना है। इसकी सफलता ने भारत की वैज्ञानिक क्षमताओं को और मजबूत किया है। यह मिशन लगभग 548 करोड़ रुपये में पूरा किया गया। इससे पहले 23 अगस्त 2023 को भारत ने चंद्रयान-3 के ज़रिए इतिहास रच दिया था। भारत, चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफल सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला दुनिया का पहला देश बना और अमेरिका, रूस और चीन के बाद चंद्रमा पर पहुंचने वाला चौथा देश बन गया। चंद्रयान-2 के आंशिक असफलता के बाद इसरो ने उससे सीखे गए सबक को आधार बनाकर चंद्रयान-3 को तैयार किया। उस मिशन के ऑर्बिटर ने चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग में अहम भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैज्ञानिकों का मनोबल बनाए रखा और पूरी दुनिया को दिखाया कि भारत हर चुनौती से सीखकर आगे बढ़ता है।