उज्जैन (01 दिसंबर 25)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को 3 दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव का शुभारंभ उज्जैन के दशहरा मैदान से किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर सभी को गीता जयंती की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जगत के गुरु भगवान श्रीकृष्ण को हम सभी नमन करते हैं। कुरूक्षेत्र के युद्ध स्थल में मोहग्रस्त अर्जुन को भगवान श्री कृष्ण द्वारा दिये गये उपदेश को समझने व आत्मसात करने के लिए प्रदेश में गीता जयंती से अन्तर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।
पवित्र नगरी उज्जैन ने हर काल, हर परिस्थिति और हर युग में अपने महत्व को बनाए रखा है। आज से लगभग 5 हजार वर्ष पूर्व भगवान श्री कृष्ण ने कंस का वध किया था, और उसके पश्चात उन्होंने उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में आकर महर्षि सांदीपनि से विद्या प्राप्त की थी। सांदीपनि आश्रम में बिना किसी भेदभाव के सभी शिष्यों को एक समान विद्या-अध्ययन करवाया जाता था। भगवान श्री कृष्ण ने जन्म से ही कई संकटों को पार करते हुए विकट परिस्थितियों में भी सहज रहकर संकटों का सामना करना हम सभी को सिखाया। कंस वध के पश्चात उन्होंने अपने नाना उग्रसेन को राज्य हस्तांतरित किया और स्वयं उज्जैन में शिक्षा ग्रहण करने के लिए आये। यहां से शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात पूरे विश्व को उनके व्यक्त्वि ने प्रभावित किया। वर्तमान में विद्या अध्ययन कर रहे सभी विद्यार्थियों को इससे प्रेरणा लेना चाहिए कि जीवन में शिक्षा का महत्व सर्वाधिक होता है। नई शिक्षा नीति के तहत श्री भगवद्गीता को कुछ राज्यों के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है और कई राज्यों ने इसे अपनी शिक्षा प्रणाली का हिस्सा बनाने के लिए कदम उठाए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में नैतिक और सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार प्रदेश में हर्षोल्लास के साथ गीता जयंती कार्यक्रम आयोजित कर रही है। पवित्र गीता एक ऐसा ग्रंथ है, जिसमें भक्ति योग, ज्ञान योग और कर्म योग के साथ संपूर्ण जीवन का सार समाहित है। यह गर्व का विषय है कि नई शिक्षा नीति-2020 में राज्य सरकार ने स्कूली पाठ्यक्रमों में गीता के ज्ञान और गोपाल कृष्ण की लीलाओं को महत्ता दी है।