श्रीनगर (25 जून 26)। श्रीनगर में आज उद्घाटित ‘सहकार से समृद्धि- विजन से जमीनी वास्तविकता तक’ विषय पर आयोजित 8वें राष्ट्रीय सम्मेलन में भारत के सहकारी क्षेत्र के भविष्य के विजन और रोडमैप पर विचार-विमर्श का प्रमुख आधार जमीनी अनुभव और वास्तविकताएं रहीं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में, सम्मेलन का फोकस पिछले पांच वर्षों की परिवर्तनकारी पहलों को जमीनी स्तर पर मापनीय परिणामों में बदलने पर रहा।
राष्ट्रीय समीक्षा सम्मेलन में राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारी, सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार, राष्ट्रीय महासंघ, सहकारी संस्थाएं और सहकारी इकोसिस्टम के प्रमुख हितधारक शामिल हुए। विचार-विमर्श का उद्देश्य प्रगति की समीक्षा करना, जमीनी स्तर की चुनौतियों की पहचान करना, सफल मॉडल साझा करना और सहकारी विकास के अगले चरण के लिए अधिक स्पष्ट रोडमैप तैयार करना रहा। सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने कहा कि एक अलग सहकारिता मंत्रालय का गठन भारत के सहकारी आंदोलन के इतिहास में एक निर्णायक क्षण रहा है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय ने बड़े पैमाने पर नियामक ढांचे से आगे बढ़कर विकासोन्मुखी और डिलीवरी-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाया है, जिसका उद्देश्य सहकारी संस्थाओं को ग्रामीण समृद्धि, समावेशी विकास और अंतिम छोर तक सेवाओं की प्रभावी डिलीवरी वाली संस्थाओं के रूप में मजबूत करना है।
डॉ. भूटानी ने कहा कि पिछले पांच वर्षों के दौरान मंत्रालय ने सहकारी क्षेत्र की बुनियाद को मजबूत करने के लिए कार्य किया है, विशेष रूप से प्राथमिक कृषि ऋण समितियों के स्तर पर। उन्होंने PACS के कंप्यूटरीकरण, मॉडल बायलॉज को अपनाने, नए बहुउद्देशीय PACS, डेयरी और मत्स्य सहकारी समितियों के गठन, PACS के व्यवसाय विविधीकरण और निर्यात, जैविक उत्पादों तथा बीजों के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर की सहकारी संस्थाओं के गठन जैसी प्रमुख पहलों को रेखांकित किया। सहकारिता मंत्रालय के सचिव ने कहा कि अब समय आ गया है कि संख्या से आगे बढ़कर सहकारी संस्थाओं में गुणवत्ता, जवाबदेही, पेशेवर प्रबंधन और जमीनी स्तर पर दिखने वाले प्रभाव पर ध्यान केंद्रित किया जाए। उन्होंने कहा कि नीति ढांचे और संस्थागत सहयोग तंत्र तैयार करने में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, लेकिन अगला चरण कार्यान्वयन, मापनीय परिणामों और जमीनी स्तर पर प्रभावी डिलीवरी पर केंद्रित होना चाहिए।