नईदिल्ली (30 जुलाई 26)। स्ट्रोक मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। अब उन्हें दोबारा बोलने की क्षमता हासिल करने में मदद मिलेगी। दरअसल, आई.आई.टी. दिल्ली के शोधकर्ताओं ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), नई दिल्ली और मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान (I.H.B.A.S.) के सहयोग से मेलोडिक इंटोनेशन थेरेपी (M.I.T.) का पहला हिंदी संस्करण विकसित किया है।
मेलोडिक इंटोनेशन थेरेपी एक संगीत-आधारित उपचार है, जो स्ट्रोक से उबरने वाले व्यक्तियों को दोबारा बोलने की क्षमता हासिल करने में मदद करता है। यह प्रायोगिक अध्ययन अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका अफेजियोलॉजी में प्रकाशित हुआ है। भारत में स्ट्रोक विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है और इससे उबरने वाले अनेक व्यक्तियों को बोलने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। स्ट्रोक आने के बाद कई व्यक्ति धाराप्रवाह बोलने की क्षमता खो देते हैं, जबकि वे भाषा को समझने में सक्षम होते हैं। हैरानी की बात यह है कि वे वर्षों से परिचित गीतों को अब भी आसानी से गा सकते हैं।
मरीज की अपनी भाषा की ध्वनियों और संरचना के अनुरूप तैयार की गई यह उपचार पद्धति देशभर के मरीजों और उनके परिवारों के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है। अन्य तकनीकों के अलावा, मेलोडिक इंटोनेशन थेरेपी पश्चिमी देशों में व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली एक संगीत-आधारित चिकित्सा पद्धति है। इसके अंतर्गत धुन और लय का प्रयोग किया जाता है और इसके माध्यम से मरीजों की पहले जैसी संगीत क्षमता तथा बोलने की क्षमता को धीरे-धीरे फिर से विकसित किया जाता है। यह थेरेपी अंग्रेज़ी और अन्य पश्चिमी भाषाओं में दशकों से उपयोग की जा रही है, लेकिन अब तक इसका कोई मान्य हिंदी संस्करण उपलब्ध नहीं था। इस स्थिति को नॉन-फ्लुएंट अफेजिया (गैर-धाराप्रवाह अफेजिया) कहा जाता है और यह स्ट्रोक के बाद होने वाले सबसे अधिक कष्टदायक प्रभावों में से एक है। इसमें मरीज सतर्क रहते हैं और बातचीत को समझने में सक्षम होते हैं, लेकिन वे शब्दों को बोल नहीं पाते। परिवारों के लिए अपने माता-पिता अथवा जीवनसाथी को किसी का नाम लेने जैसी साधारण बात कहने के लिए संघर्ष करते हुए देखना अत्यंत पीड़ादायक होता है।