नईदिल्ली (20 जुलाई 26)। संसद के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को प्रस्तावित 'चलो संसद' मार्च से पहले सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन ने नया मोड़ ले लिया है। वांगचुक ने अपनी पत्नी गीतांजलि आंग्मो के जरिए संदेश दिया है कि अगर राजनीतिक दल संसद में शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और कथित नीट अनियमितताओं का मुद्दा उठाने का भरोसा दें तो वह अपना अनशन खत्म कर देंगे।
दूसरी ओर दिल्ली पुलिस ने साफ कर दिया है कि संसद मार्च की अनुमति नहीं दी गई है, जबकि दिल्ली हाईकोर्ट ने फिलहाल उन्हें निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने से इनकार कर दिया है। ऐसे में संसद सत्र के पहले दिन आंदोलन, राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था पर पूरे देश की नजरें टिकी है। सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने रविवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि वांगचुक ने संदेश भेजा है कि अगर राजनीतिक दलों के नेता सफदरजंग अस्पताल पहुंचकर उन्हें यह भरोसा दिलाते हैं कि मानसून सत्र के दौरान शिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही और कथित नीट अनियमितताओं का मुद्दा संसद में उठाया जाएगा, तो वह सोमवार को अपना अनशन समाप्त कर देंगे। उन्होंने समर्थकों से अपील की कि प्रस्तावित 'चलो संसद' मार्च पूरी तरह शांतिपूर्ण रहे और आंदोलन का किसी भी गलत उद्देश्य के लिए इस्तेमाल न होने दिया जाए। रविवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि फिलहाल वांगचुक को निजी अस्पताल भेजने का कोई अंतरिम आदेश देने की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने माना कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए सरकार द्वारा उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले जाना मनमाना नहीं कहा जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं और इलाज उनकी सहमति के आधार पर ही किया जा रहा है। हालांकि हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और सफदरजंग अस्पताल को नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा है. मामले की अगली सुनवाई 24 जुलाई को होगी।