नईदिल्ली (19 मार्च 26)। दिग्विजय सिंह ने राज्यसभा में अपने कार्यकाल के अंतिम चरण में ऐसा भाषण दिया, जिसने राजनीति के गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी। अप्रैल में कार्यकाल समाप्त होने से पहले उन्होंने भावुक अंदाज़ में विदाई संदेश दिया, लेकिन साथ ही साफ कर दिया- 'मैं न टायर्ड हूं, न रिटायर्ड हूं।'
अपने भाषण के दौरान अटलबिहारी वाजपेयी की कविता की पंक्तियां पढ़ते हुए दिग्विजय सिंह ने लोकतंत्र में संवाद और मर्यादा की अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संसद में कटुता नहीं, संवाद होना चाहिए। दिग्विजय सिंह ने अपने राजनीतिक सफर को याद करते हुए Indira Gandhi और Rajiv Gandhi का आभार जताया। उन्होंने बताया कि इंदिरा गांधी ने ही उन्हें कांग्रेस में प्रवेश दिलाया था। उन्होंने अपने जीवन की दिलचस्प शुरुआत बताते हुए कहा- 22 साल की उम्र में निर्विरोध नगर पालिका अध्यक्ष, 30 साल में विधायक, 33 साल में मंत्री, 40 साल में मुख्यमंत्री और इस पूरे सफर में उन्होंने कभी अपनी विचारधारा से समझौता नहीं किया।
अपने भाषण में उन्होंने कहा कि अगर उनके शब्दों से कभी किसी को ठेस पहुंची हो तो वे क्षमाप्रार्थी हैं। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी किसी के प्रति कटुता नहीं रखी। दिग्विजय सिंह ने तीसरी बार राज्यसभा जाने से इनकार कर दिया है। अब राजनीतिक संकेत साफ हैं- वे मध्य प्रदेश की राजनीति में फिर से सक्रिय भूमिका निभाने जा रहे हैं। हाल के दौरों और बयानबाजी से यह साफ झलक भी रहा है।