न्यूयार्क (30 जुलाई 26)। दुनिया में अवैध मछली पकड़ने के सबसे बड़े आरोपी के तौर पर चीन एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय विवादों में घिर गया है। अमेरिका स्थित अफ्रीका डिफेंस फोरम की रिपोर्ट में चीन को दुनिया का सबसे बड़ा 'अवैध मछली चोर' बताया गया है। इसी बीच चीन ने अवैध, गैर-रिपोर्टेड और अनियमित मछली पकड़ने पर रोक लगाने के लिए तैयार किए गए 'मोम्बासा घोषणा पत्र' और ग्लोबल चार्टर फॉर फिशरीज ट्रांसपेरेंसी पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया है। चीन के इस कदम ने समुद्री संसाधनों के संरक्षण और वैश्विक पारदर्शिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
अमेरिका स्थित अफ्रीका डिफेंस फोरम की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन दुनिया का सबसे बड़ा अवैध मछली पकड़ने वाला देश है। रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया का सबसे बड़ा दूर-दराज़ समुद्री मछली पकड़ने वाला बेड़ा होने के बावजूद चीन ने ग्लोबल चार्टर फॉर फिशरीज ट्रांसपेरेंसी पर हस्ताक्षर नहीं किए। इस घोषणा पत्र पर कैमरून, गाम्बिया, घाना, गिनी, लाइबेरिया, कांगो गणराज्य और सोमालिया सहित कई अफ्रीकी देशों ने हस्ताक्षर किए। इनके अलावा बेल्जियम, फ्रांस, चिली, पनामा, पापुआ न्यू गिनी, पेरू, डोमिनिकन रिपब्लिक और दक्षिण कोरिया भी इस पहल में शामिल हुए। इस वैश्विक चार्टर का मकसद दुनिया भर में मत्स्य उद्योग में पारदर्शिता बढ़ाना है। इसके तहत सभी औद्योगिक मछली पकड़ने वाले जहाजों को यूनिक पहचान संख्या देना अनिवार्य होगा। मछली पकड़ने के लाइसेंस, परमिट, कोटा और समुद्री समझौतों की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। जहाजों के वास्तविक मालिकों की पहचान दर्ज की जाएगी, ताकि अवैध गतिविधियों के लिए जिम्मेदारी तय की जा सके। रिपोर्ट के अनुसार, चीनी जहाजों पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इनमें सबसे बड़ा आरोप बॉटम ट्रॉलिंग का है। इस तकनीक में समुद्र की तलहटी पर विशाल जाल घसीटकर मछलियों और अन्य समुद्री जीवों को अंधाधुंध पकड़ा जाता है।