कोलकाता (14 जुलाई 26)। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने कहा कि कुछ 'यात्रा टिकट परीक्षक' (टीटीई) रेलगाड़ियों में खाली बर्थ को 'बाजार में सब्जियों की तरह बेचते हैं।' अदालत ने देश के सभी रेलवे मंडलों के महाप्रबंधकों को निर्देश दिया कि ऐसे मामलों में दोषी टीटीई के खिलाफ उपलब्ध अधिकतम दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उच्च न्यायालय ने कहा कि ऐसी ही एक घटना के कारण मादक पदार्थ देकर दो यात्रियों से लूटपाट की गयी और मादक पदार्थ के कारण ही उनमें से एक यात्री की मौत हो गयी।
अदालत ने कहा कि फरवरी 2009 में न्यू जलपाईगुड़ी से सियालदह जा रही तीस्ता-तोरसा एक्सप्रेस में दो व्यक्ति अनारक्षित टिकट लेकर सवार हुए थे। उन्होंने टीटीई को रिश्वत देकर बर्थ हासिल की। बाद में दो अपराधियों ने उनके कीमती सामान लूटने के इरादे से उन्हें नशीला पदार्थ दे दिया। इनमें से एक यात्री की उसे दिए गए नशीले पदार्थ के कारण मौत हो गयी। उसे पहले से अन्य गंभीर बीमारियां थीं। न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा और न्यायमूर्ति बिस्वरूप चौधरी की खंडपीठ ने कहा, 'यह अदालत इस फैसले की प्रति पूर्वी रेलवे सहित देश के सभी रेलवे मंडलों के महाप्रबंधकों को भेज रही है, ताकि ट्रेन की खाली बर्थ को बाजार में सब्जियों की तरह बेचने वाले टीटीई के खिलाफ उपलब्ध अधिकतम दंड सुनिश्चित किया जा सके।' अदालत ने कहा कि टीटीई के इस आचरण के कारण एक ऐसे यात्री की जान चली गई, जिससे केवल लूटपाट की गयी थी।
खंडपीठ ने कहा, 'ऐसे कई मामले हैं, जिनकी रिपोर्ट तक दर्ज नहीं होती, लेकिन उनमें मामूली चोरी के शिकार लोगों को गंभीर चिकित्सकीय परिणाम भुगतने पड़ते हैं।' खंडपीठ ने पिछले सप्ताह दिए आदेश में कहा कि ऐसे अपराधों के लिए टीटीई की भूमिका ही मूल कारण बनती है। अदालत ने जांच और अभियोजन में कई गंभीर खामियों को लेकर पुलिस की भी कड़ी आलोचना की। इस मामले में आलोक घोष और गोपाल मिस्त्री को निचली अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत हत्या, धारा 328 के तहत जहर या नशीला पदार्थ देकर नुकसान पहुंचाने, चोरी करने तथा जीवित बचे यात्री की हत्या के प्रयास के आरोप में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास तथा अन्य सजाएं सुनाई थीं। सभी सजाएं साथ-साथ चलने का आदेश दिया गया था।