नईदिल्ली (24 सितंबर 26)। चुनाव आयोग ने कहा कि वह संविधान के तहत मिली जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। चुनाव आयोग के अंदर दो चुनाव आयुक्तों की असहमतियों के बीच उपजे विवाद पर चुनाव आयोग ने सफाई दी है और कहा है कि आयोग के अंदर सभी फैसले सर्वसम्मति से हो रहे हैं। वैचारिक मतभेद का मतलब टकराव नहीं समझा जाना चाहिए। किसी भी संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां होना सामान्य बात है। ये अंतिम फैसला लेने से पहले निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं। न केवल तीनों आयुक्तों, बल्कि आयोग का हर अधिकारी चुनावी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आयोग को अपने सुझाव देने के लिए पूरी तरह से अधिकृत है।
आयोग ने बयान में कहा कि दस महीनों के दौरान की कुछ खास आंतरिक टिप्पणियों/अवलोकनों को उजागर करना, जबकि बड़ी संख्या में मंजूरियों, फैसलों, निर्देशों और पहलों को नजरअंदाज करना, तस्वीर का केवल एक हिस्सा ही दिखाता है। हाल के महीनों में आयोग ने कई फैसले लेने के साथ ही निर्देश जारी किये हैं तथा लगभग 40 नयी पहलें शुरू की हैं और देश भर में मतदाता सूची संशोधन के संचालन सहित कई चुनावी सुधार किये हैं। ये सभी फैसले पिछले एक साल में पूरे आयोग के सर्वसम्मत फैसलों के परिणाम हैं। आयोग के मुताबिक ईसीआईनेट जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म सख्त डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत काम करते हैं। इनमें अनधिकृत छेड़छाड़ या डेटा में बदलाव रोकने के लिए आईटी सुरक्षा जांच और ऑडिट नियंत्रण लागू हैं। आयोग ने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने का काम निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों और जिला निर्वाचन अधिकारियों जैसे वैधानिक अधिकारी कानून के तहत अपने निर्धारित अधिकारों के अनुसार करते हैं। यानी आयोग के अनुसार यह अधिकार तय कानूनी प्रक्रिया के तहत इस्तेमाल किये जाते हैं। आयोग के मुताबिक किसी फैसले को अंतिम रूप देने से पहले सदस्यों के बीच चर्चा होती है और इस दौरान अलग-अलग राय, सुझाव या प्रशासनिक सवाल उठना सामान्य प्रक्रिया है। इनका उद्देश्य चुनावी व्यवस्था को मजबूत करना और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना है।
भारत निर्वाचन आयोग के कामकाज को लेकर राजनीतिक टकराव को बढ़ाते हुए, कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंहवी ने बुधवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि वे कार्यपालिका (सरकार) के साथ मिलकर एक समानांतर व्यवस्था चला रहे हैं। मीडिया को संबोधित करते हुए और इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट का हवाला देते हुए जिसमें कहा गया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' प्रक्रिया और वोटर लिस्ट से जुड़े फैसलों पर कई बार आपत्ति जताई थी, सिंहवी ने चुनाव आयोग को नियंत्रित करने वाले ऐतिहासिक न्यायिक पैमानों की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने दशकों पहले यह तय किया था कि यह पैनल सामूहिक रूप से काम करता है, न कि किसी एक सर्वोच्च अधिकारी के अधीन। इस मुद्दे पर तृणमूल नेता ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी, सपा नेता अखिलेश यादव, राजद नेता तेजस्वी यादव, शिवसेना यू नेता उद्धव ठाकरे सहित अनेक विपक्षियों ने चुनवायुक्त के इस्तीफे की मांग करते हुए सरकार की भी खिंचाई की है।