भोपाल (14 सितंबर 24)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पृथ्वी पर माँ नर्मदा स्वयंमेव अस्तित्व में है। मध्यप्रदेश के निवासी सौभाग्यशाली हैं, जो माँ नर्मदा से जीवन पाते हैं। उन्होंने कहा कि माँ नर्मदा जहाँ लोगों की आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है, वहीं हमारी एग्रीकल्चर ग्रोथ की वृद्धि में बड़ी भूमिका माँ नर्मदा की जल धारा की है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा प्रयास यह है कि माँ नर्मदा के दोनों किनारे में पवित्रता बनी रहे और जल धारा अविरल बहती रहे। पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचे। नजदीकी बस्तियों एवं कस्बे के सीवर से भी जल की शुद्धता का प्रयास होता रहे, इसके लिए सरकार के अलग-अलग विभाग समन्वित रूप से योजना बनाकर काम करेंगे। नर्मदा जी का जहाँ से उद्गम है, वहां एक सघन वन से ऐसा माना जाता है कि जल धारा के प्रवाह में मदद मिलती है, उस वन को भी हमें सुरक्षित रखना है और अमरकंटक में बढ़ती मानव बस्ती से उद्गम को कोई खतरा उत्पन्न नहीं हो, इसके लिए अथॉरिटी नर्मदा जी के उद्गम के संरक्षण का काम करेगी। आबादी के लिए माँ नर्मदा के उद्गम से दूर एक वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार करेगी। मंडला, डिंडोरी, नरसिंहपुर, नर्मदापुरम, देवास, ओंकारेश्वर तीर्थ हैं, जिनके मार्ग का बेहतर प्रबंधन किया जाएगा। घाट पर सुरक्षित स्नान की पर्याप्त सुविधा हो। श्रद्धालु माँ नर्मदा की सहजता से परिक्रमा कर लें, इसके लिए परिक्रमा मार्ग पर संकेतक लगाए जाएंगे। जहां निर्जन क्षेत्र है, वहां आश्रम बनाए जाएंगे।