नईदिल्ली (15 जुलाई 25)। देश में करोड़ों लोगों के पास आधार कार्ड है, लेकिन इनमें से कई ऐसे लोग भी हैं जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। ऐसे लोगों के आधार कार्ड का गलत इस्तेमाल न हो, इसके लिए UIDAI (भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण) ने एक खास मुहिम शुरू की है। इस अभियान के तहत मृत व्यक्तियों के आधार नंबर को बंद (निष्क्रिय) किया जा रहा है, ताकि कोई भी उनका दुरुपयोग न कर सके।
ताजा आंकड़ों के अनुसार, बिहार में कुल 12 करोड़ 9 लाख 36 हजार 645 आधार कार्ड जारी किए गए हैं। लेकिन UIDAI द्वारा चलाए जा रहे अभियान के तहत मृत व्यक्तियों के आधार नंबर को निष्क्रिय करने के बाद अब यह संख्या घटकर 11 करोड़ 43 लाख 50 हजार 755 रह गई है। यानी अब तक 65 लाख से अधिक आधार नंबर सिस्टम से हटाए जा चुके हैं।
मृतकों के आधार कार्ड क्यों किए जा रहे हैं बंद?- UIDAI के इस अभियान का मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना है कि आधार डेटाबेस में केवल जीवित और पात्र लोगों की जानकारी ही मौजूद रहे। इससे कई फायदे होंगे: जैसे सरकारी योजनाओं का लाभ सही लाभार्थियों तक पहुंचेगा। पहचान संबंधी धोखाधड़ी पर रोक लगेगी। बिहार में चुनाव भी करीब हैं, ऐसे में यह कदम फर्जीवाड़े और अवैध लाभों को रोकने की दिशा में एक जरूरी प्रयास है।
यह प्रक्रिया कैसे हो रही है?- UIDAI द्वारा इस कार्य के लिए तकनीकी और कानूनी दोनों स्तरों पर संवेदनशील प्रक्रिया अपनाई जा रही है: मृत्यु प्रमाण पत्र का उपयोग किया जा रहा है नगर निगम, ग्राम पंचायत या अन्य स्थानीय निकायों से मिली जानकारी को भी शामिल किया गया है। परिवार के सदस्यों द्वारा दी गई सूचना के आधार पर भी सत्यापन किया जा रहा है। यह पूरी प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि कोई जीवित व्यक्ति गलती से इस सूची में न आ जाए।
फर्जी आधार कार्ड और ऑपरेटरों पर कार्रवाई- UIDAI ने हाल ही में कुछ फर्जी आधार कार्ड और आधार केंद्रों पर गड़बड़ियों का भी पता लगाया है। जांच में सामने आया है कि कुछ ऑपरेटर्स ने नियमों को ताक पर रखकर फर्जी कार्ड बनाए हैं। ऐसे ऑपरेटर्स पर जुर्माना लगाया गया है और कई मामलों में लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई भी की जा रही है।