Sunday, 27 Sep 2026

साइबर, भू-राजनीतिक खतरों से सतर्क रहें: वैष्णव

नईदिल्ली (21 सितंबर 26)। भारत की बढ़ती सेमीकंडक्टर क्षमता को वैश्विक चिप आपूर्ति श्रृंखला में स्थापित कुछ हितधारक 'खतरे' के रूप में देख सकते हैं। ऐसे में भारत को संभावित साइबर हमलों, भू-राजनीतिक जोखिमों और अन्य व्यवधानों से निपटने के लिए सतर्क रहना होगा। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यह बात कही है।

वैष्णव ने पीटीआई-भाषा के साथ साक्षात्कार में कहा कि भारत अब ऐसे देश के रूप में उभर रहा है, जो सेमीकंडक्टर के डिजाइन और विनिर्माण-दोनों क्षेत्रों में अपनी क्षमता विकसित कर रहा है। ऐसे में वैश्विक चिप उद्योग में पहले से मजबूत स्थिति रखने वाले कुछ देशों और कंपनियों के हित प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने कहा, 'भारत को इस बदलाव से जुड़े संभावित भू-राजनीतिक जोखिमों के प्रति लगातार सजग रहना होगा।' मंत्री ने कहा, 'भारत अब एक ऐसे देश के रूप में उभर रहा है जो चिप का डिजाइन और विनिर्माण कर सकता है। जाहिर है, इसे कई स्थापित खिलाड़ियों के लिए चुनौती के रूप में देखा जा सकता है।' वैष्णव ने बताया कि उन्होंने सेमीकंडक्टर उद्योग को स्पष्ट रूप से संभावित खतरों के लिए तैयार रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि कंपनियों को साइबर हमलों के साथ-साथ अन्य प्रकार के व्यवधानों और जोखिमों के लिए भी अपनी तैयारियां मजबूत करनी चाहिए।

वैष्णव ने कहा कि दुनिया के कई देश भारत को एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में देख रहे हैं और अपने उत्पादों के विकास तथा विनिर्माण के लिए भारत का रुख कर रहे हैं। ऐसे में भारत अपनी उभरती रणनीतिक स्थिति को हल्के में नहीं ले सकता। भारत सरकार सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अपनी मौजूदगी को केवल चिप असेंबली और परीक्षण तक सीमित नहीं रखना चाहती। सरकार का लक्ष्य चिप डिजाइन, विनिर्माण, उपकरण, सामग्री, उन्नत पैकेजिंग, अनुसंधान एवं विकास तथा कुशल मानव संसाधन समेत पूरे सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र को विकसित करना है। जुलाई में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 'सेमीकॉन 2.0' को मंजूरी दी थी, जिसके तहत 1.27 लाख करोड़ रुपये के निवेश से चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर उपकरण एवं सामग्री, फैब, उन्नत पैकेजिंग, अनुसंधान एवं विकास तथा प्रतिभा विकास को बढ़ावा दिया जाएगा।

Tags:

Follow us

This question is not available..!