Sunday, 04 Oct 2026

सामाजिक समरसता के लिए संत समाज हरसंभव प्रयास करे: राष्ट्रपति

छतरपुर (26 फरवरी 25)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, राज्यपाल मंगुभाई पटेल तथा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की गरिमामय उपस्थिति में बागेश्वर धाम में 251 जोड़ों का सामूहिक विवाह महोत्सव हुआ। भव्य समारोह में राष्ट्रपति मुर्मु ने महाशिवरात्रि पर्व पर आयोजित सामूहिक विवाह में दाम्पत्य सूत्र में बंध रहे जोड़ों को आशीर्वाद प्रदान करते हुए उनके सुखमय जीवन की कामना की। राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि समकालीन समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने और समाज को जागरूक करने के लिए पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की पहल सराहनीय है। उन्होंने संत समाज से मानव कल्याण की भावना के साथ देश में सामाजिक समरसता बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास करने का आह्वान किया। 

राष्ट्रपति के सम्मुख जोड़ों की वरमाला रस्म संपन्न हुई, उन्होंने प्रतीक स्वरूप 3 जोड़ों को उपहार भेंट किए। श्री बागेश्वर धाम जन सेवा समिति द्वारा आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में शामिल हुईं 251 बेटियों में से 108 बेटियां जनजातीय समुदाय की हैं। राष्ट्रपति के बागेश्वर धाम पहुंचने पर पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने अंगवस्त्रम और तुलसी की माला भेंट कर उनका अभिनंदन किया। राष्ट्रपति मुर्मु को पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने हनुमान यंत्र, बालाजी सरकार का विग्रह, धाम से जुड़ा साहित्य और स्मृति चिन्ह भी भेंट किये। इस अवसर पर धाम द्वारा आयोजित छठे सामूहिक विवाह महोत्सव पर केंद्रित लघु फिल्म का प्रदर्शन हुआ। समारोह में खजुराहो सांसद वी.डी. शर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे। मुर्मु ने पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री और श्री बागेश्वर धाम सेवा समिति द्वारा कराए जा रहे सामूहिक कन्या विवाह समारोह की सराहना की। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने नव दम्पतियों को उपहार दिए।

ज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज के लिए अनुकरणीय हैं। समाज के हर वर्ग को लाभ पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने वसुधैव कुटुबम्कम की भावना और 'सर्वे भवंतु सुखिन:, सर्वे संतु निरामय:' के विचार को चरितार्थ करके दिखाया है। पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने समाज से मंदिरों की दान पेटियों की राशि को गरीब परिवारों की बेटियों के उत्थान में लगाने का आव्हान किया। उन्होंने कहा कि यदि सभी मठ, मंदिर, धाम और समाज के सभी लोग यह संकल्प ले लेते हैं, तो भारत को विश्व गुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता। समारोह में लगभग 20 देश के एनआरआई, देश के विभिन्न क्षेत्रों से पधारे दिव्य संत, वर-वधु के परिजन और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक सम्मिलित हुए।

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