नईदिल्ली (11 जुलाई 26)। पेट्रोलियम मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि भारत का इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम मौजूदा सरकार के समय शुरू नहीं हुआ था, बल्कि इस पहल का एक लंबा संस्थागत इतिहास और कई अहम पड़ाव रहे हैं। मंत्रालय ने कहा कि E10 से E20 इथेनॉल ब्लेंडिंग में बदलाव किसी अंदाज़े पर नहीं, बल्कि कई सालों की टेस्टिंग, मैन्युफैक्चरर्स के साथ बातचीत और फील्ड के अनुभव पर आधारित था। मंत्रालय ने एक विस्तृत बयान में कहा, '2001 में एक पायलट इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम शुरू किया गया था, 2004 में इसकी औपचारिक घोषणा की गई थी और 2006 तक कई राज्यों में E5 (5 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग) लागू कर दिया गया था। इसके बाद UPA सरकार के दौरान जनवरी 2013 में Gazette of India में पॉलिसी फ्रेमवर्क को अधिसूचित किया गया था। ये सभी बातें सार्वजनिक रिकॉर्ड का हिस्सा हैं।'
भारत ने 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 5% इथेनॉल ब्लेंडिंग हासिल करने का लक्ष्य रखा था। मंत्रालय ने बताया कि दुर्भाग्य से, उस महत्वाकांक्षा के बावजूद, 2014 तक ब्लेंडिंग लगभग 1.5 प्रतिशत पर ही अटकी रही। पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा, 'किसी ने भी ईंधन के तौर पर इथेनॉल पर सवाल नहीं उठाया। यह बात वैश्विक स्तर पर पहले ही तय हो चुकी थी। असली चुनौती यह थी कि भारत कैसे पर्याप्त मात्रा में इथेनॉल का उत्पादन कर सकता है।' उस समय, भारत लगभग पूरी तरह से गन्ने पर निर्भर था, जो एक मौसमी फसल है और इसकी सालाना इथेनॉल उत्पादन क्षमता लगभग 400 करोड़ लीटर थी। उत्पादन का यह स्तर मामूली ब्लेंडिंग लक्ष्यों के लिए भी अपर्याप्त था। इस कमी को समझते हुए, सरकार ने अपने नज़रिए में बुनियादी बदलाव किया। मई 2018 में 'नेशनल पॉलिसी ऑन बायोफ्यूल्स' (जैव-ईंधन पर राष्ट्रीय नीति) शुरू होने के साथ, सरकार ने बड़े पैमाने पर इथेनॉल उत्पादन के लिए ज़रूरी इकोसिस्टम बनाना शुरू किया। यह सरकार का एक वास्तविक 'होल-ऑफ-गवर्नमेंट' (पूरी सरकार का) मिशन बन गया।