नईदिल्ली (03 जनवरी 25)। एक नया साइबर घोटाला सामने आया है, जिसमें बेरोजगार युवाओं, गृहणियों, छात्रों और जरूरतमंद लोगों को निशाना बनाया जाता है और वे प्रतिदिन बड़ी रकम गंवा रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय की नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गयी है। रिपोर्ट के अनुसार, इसे 'पिग बुचरिंग स्कैम' या 'निवेश घोटाले”' के रूप में भी जाना जाता है। इसमें कहा गया है कि साइबर अपराधी इन अपराधों को शुरू करने के लिए गूगल सेवा मंच का भी उपयोग कर रहे हैं। इसमें कहा गया, “गूगल विज्ञापन मंच सीमा पार से लक्षित विज्ञापन के लिए एक आसान सुविधा प्रदान करता है। ‘पिग बुचरिंग स्कैम' या ‘निवेश घोटाला' के रूप में जाना जाने वाला यह घोटाला एक वैश्विक मामला है और इसमें बड़े पैमाने पर धन शोधन और यहां तक कि 'साइबर स्लेवरी' भी शामिल है।”
माना जाता है कि 2016 में चीन में शुरू हुआ ‘पिग बुचरिंग स्कैम' भोले-भाले व्यक्तियों को निशाना बनाता है, जिनका साइबर अपराधी समय के साथ भरोसा जीतते हैं और अंततः उन्हें क्रिप्टोकरेंसी या किसी अन्य आकर्षक योजना में निवेश करने के लिए राजी कर लेते हैं और फिर उनकी रकम चोरी कर लेते हैं। ‘पिग बुचरिंग' की उपमा सूअरों को मारे जाने से पहले उन्हें खिला पिलाकर मोटा किये जाने से आई है। इस खतरे पर अंकुश लगाने के लिए गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) ने समय-समय पर तत्काल कार्रवाई के लिए खतरे की खुफिया जानकारी साझा करने के वास्ते गूगल के साथ साझेदारी की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि साइबर अपराधी भारत में अवैध रूप से ऋण देने वाले ऐप शुरू करने के लिए प्रायोजित फेसबुक का उपयोग कर रहे हैं। इसमें कहा गया, 'ऐसे लिंक की सक्रिय रूप से पहचान की जाती है और आवश्यक कार्रवाई के लिए उन्हें फेसबुक तथा फेसबुक पेजों के साथ साझा किया जाता है।' रिपोर्ट में कहा गया है कि व्हाट्सऐप भारत में साइबर अपराधियों द्वारा संभवतः दुरुपयोग किया जाने वाला सबसे बड़ा सोशल मीडिया मंच बना हुआ है।