Wednesday, 30 Sep 2026

साहित्य से पुस्तकालयों को समृद्ध करने की आवश्यकता: परमार

भोपाल (29 अगस्त 25)। उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा है कि भारतीय ज्ञान परम्परा में पुस्तकालय सदैव ही समृद्ध रहे हैं। नालंदा विश्वविद्यालय में विश्व का सबसे विशाल पुस्तकालय था और तब भारत विश्व गुरु की संज्ञा से सुशोभित था। विश्व भर के लोग हमारे यहां शिक्षा ग्रहण करने आते थे। भारत का ज्ञान सार्वभौमिक था। हमारी संस्कृति में ज्ञान का दस्तावेजीकरण नहीं था। हमारे पूर्वजों ने शोध एवं अध्ययन कर ज्ञान को परंपरा के रूप में समाजव्यापी बनाया। अतीत के विभिन्न कालखंडों में योजनाबद् तरीके से हमारे ज्ञान को दूषित करने का कुत्सित प्रयास किया गया। भारतीय समाज में विद्यमान परंपरागत ज्ञान को पुनः शोध एवं अनुसंधान के साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण के सापेक्ष युगानुकुल परिप्रेक्ष्य में दस्तावेजीकरण से समृद्ध करने की आवश्यकता है। पुस्तकालय मानवता, नवाचार और राष्ट्रीय चरित्र निर्माण के मूल आधार हैं। भारतीय दृष्टिकोण से समृद्ध साहित्य से समस्त पुस्तकालयों को समृद्ध करने की आवश्यकता है। यह बात मंत्री परमार ने शुक्रवार को भोपाल स्थित राष्ट्रीय विधि संस्थान विश्वविद्यालय (एनएलआईयू) में संस्थान के केंद्रीय पुस्तकालय ज्ञान मंदिर के तत्वावधान में 'विकसित भारत के पुस्तकालयों की पुनर्कल्पना' विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन 'ज्ञानोत्सव-2025' में कही।

मंत्री परमार ने कहा कि भारत में हर क्षेत्र हर विषय में व्यापक ज्ञान था और भारत हर क्षेत्र में विश्वमंच पर अग्रणी एवं समृद्ध था। भारत की धरोहर इस परंपरागत ज्ञान को भारत के सापेक्ष भारतीय दृष्टि से संजोने एवं सहेजने की आवश्यकता है। पुस्तकालयों को भारतीय दृष्टि से समृद्ध साहित्य से समृद्ध बनाना होगा, समृद्ध पुस्तकालयों से विकसित एवं समृद्ध राष्ट्र का बौद्धिक सृजन होगा। सम्मेलन का उद्देश्य 'विकसित भारत के पुस्तकालयों की पुनःपरिकल्पना' विषय पर ज्ञान, परम्परा तथा तकनीक के समावेश के माध्यम से पुस्तकालयों को नवाचार, समावेशन एवं नीति निर्माण का केंद्र बिंदु बनाना है। विविध सम्मेलन में देशभर के विभिन्न प्रांतों से 150 से अधिक प्रतिभागी सहभागिता कर रहे हैं। इनमें आईआईटी, आईआईएम, एनएलयू, उच्च न्यायालय, योजना संस्थान, शोध केंद्रों, प्रदेश एवं केंद्रीय विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि सम्मिलित हैं। सम्मेलन में राष्ट्रीय विधि संस्थान विश्वविद्यालय भोपाल के कुलगुरु डॉ. एस. सूर्यप्रकाश, रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय झांसी के पुस्तकालयाध्यक्ष एवं रजिस्ट्रार डॉ. शिवपाल सिंह कुशवाह, राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एनएलयू) दिल्ली की पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. प्रिया राय, राष्ट्रीय विधि संस्थान विश्वविद्यालय भोपाल के कुलसचिव विवेक बक्शी एवं कार्यक्रम समन्वयक मोहित गुप्ता सहित देश भर से पुस्तकालयाध्यक्ष, विषयवेत्ता सहित संस्थान के प्राध्यापक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।


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