बीजिंग (01 सितंबर 26)। दमिश्क में नई सरकार के सामने अब सिर्फ देश को स्थिर करने की चुनौती नहीं है, बल्कि चीन की नाराजगी भी बढ़ती दिख रही है। सीरिया की नई सत्ता में विदेशी लड़ाकों, खासकर चीन के शिनजियांग क्षेत्र से जुड़े उइगर लड़ाकों को सरकारी सैन्य ढांचे में शामिल किए जाने की रणनीति बीजिंग को रास नहीं आ रही है। चीन को आशंका है कि सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त ये लड़ाके भविष्य में उसके खिलाफ इस्तेमाल हो सकते हैं। विश्लेषक डॉ. नादिया हेल्मी के अनुसार, सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शरा की रणनीति विदेशी लड़ाकों को खत्म करने के बजाय उन्हें नए सीरियाई राज्य के सैन्य ढांचे में शामिल करने की है। इस रणनीति के तहत विदेशी लड़ाकों को नियमित सैन्य इकाइयों में शामिल कर उन्हें सीरियाई नागरिकता और सरकारी पहचान देने की कोशिश की जा रही है।
विश्लेषण में 84वीं और 88वीं डिवीजन जैसी इकाइयों का भी उल्लेख किया गया है। दमिश्क का तर्क माना जा रहा है कि इन लड़ाकों को राज्य के नियंत्रण में लाने से वे अलग-अलग सशस्त्र गुटों के रूप में विद्रोह नहीं करेंगे और नई सरकार को आंतरिक स्थिरता हासिल करने में मदद मिलेगी। लेकिन बीजिंग इसे बिल्कुल अलग नजरिए से देखता है। चीन की सबसे बड़ी चिंता उइगर लड़ाकों का भविष्य है। चीन लंबे समय से तुर्किस्तान इस्लामिक पार्टी (TIP) और उससे जुड़े उइगर लड़ाकों को अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मानता रहा है।बीजिंग की चिंता यह है कि अगर इन लड़ाकों को सीरियाई सेना का हिस्सा बनाकर कानूनी दर्जा और सरकारी दस्तावेज मिल जाते हैं, तो वे केवल सीरिया तक सीमित नहीं रहेंगे।चीन को आशंका है कि इससे इन लड़ाकों की आवाजाही आसान हो सकती है और भविष्य में वे मध्य एशिया या चीन के शिनजियांग क्षेत्र तक पहुंच सकते हैं। यही वजह है कि बीजिंग एकीकरण की नीति के बजाय निरस्त्रीकरण, विघटन और जरूरत पड़ने पर प्रत्यर्पण पर जोर देता दिखाई देता है।
चीन को डर है कहीं सीरिया नया लॉन्चपैड न बन जाए। इस पूरे विवाद का सबसे संवेदनशील पहलू चीन की सुरक्षा चिंता है। विश्लेषण के अनुसार, बीजिंग को डर है कि सीरिया में सैन्य रूप से प्रशिक्षित उइगर लड़ाकों का कोई संगठित ढांचा भविष्य में चीन के खिलाफ गतिविधियों का केंद्र बन सकता है। चीन विशेष रूप से इस संभावना को लेकर चिंतित है कि इन लड़ाकों का इस्तेमाल दूसरे क्षेत्रीय या अंतरराष्ट्रीय शक्तियां चीन के खिलाफ दबाव बनाने के लिए कर सकती हैं। इसमें तुर्किये और अमेरिका जैसे देशों की संभावित भूमिका को लेकर भी चीनी रणनीतिक हलकों में चिंता बताई गई है। उइगर लड़ाकों का मुद्दा अब चीन-सीरिया संबंधों में केवल आतंकवाद या सुरक्षा का विषय नहीं रह गया है। इसके आर्थिक और कूटनीतिक प्रभाव भी पड़ सकते हैं।