नईदिल्ली (06 सितंबर 25)। एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं के लिए ट्रायल शुरू करने की अनुमति मिल गई है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने स्टारलिंक को गैर-व्यावसायिक ट्रायल के लिए प्रोविजनल स्पेक्ट्रम आवंटित किया है। यह स्पेक्ट्रम छह महीने की अवधि के लिए दिया गया है, जिसके दौरान कंपनी सैटेलाइट इंटरनेट की तकनीकी और सुरक्षा टेस्टिंग करेगी। मनी कंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, दूरसंचार विभाग ने स्टारलिंक सैटेलाइट कम्युनिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड को यूनिफाइड लाइसेंस जारी किया है। यह लाइसेंस स्टारलिंक को तब मिला, जब कंपनी ने DoT द्वारा निर्धारित सुरक्षा संबंधी शर्तों सहित सभी जरूरी शर्तों को स्वीकार कर लिया। इन शर्तों का पालन सभी सैटेलाइट कम्युनिकेशन कंपनियों के लिए अनिवार्य है।
DoT के अनुसार, स्टारलिंक भारत में शुरुआत में 10 स्थानों पर अपना ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करेगी, जिसमें मुंबई इसका मुख्य हब होगा। कंपनी को कमर्शियल रोलआउट से पहले भारतीय सुरक्षा मानदंडों का पालन सुनिश्चित करना होगा। स्टारलिंक को ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशन बाय सैटेलाइट (GMPCS), कमर्शियल VSAT CUG, और इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर (ISP) 'A' सर्विस के लिए भी अनुमति प्राप्त हो चुकी है। दूरसंचार राज्य मंत्री पेम्मासानी चंद्र शेखर ने राज्यसभा में बताया कि अस्थायी स्पेक्ट्रम का आवंटन अक्टूबर 2023 में जारी दिशानिर्देशों के तहत किया गया है। यह स्पेक्ट्रम केवल तकनीकी और सुरक्षा अनुपालन प्रदर्शित करने के लिए छह महीने की अवधि तक के लिए दिया गया है और इसका उपयोग व्यावसायिक सेवाओं के लिए नहीं किया जा सकता। स्टारलिंक का अगला कदम पूर्ण स्पेक्ट्रम असाइनमेंट प्राप्त करना है, जिसके नियमों को अभी अंतिम रूप दिया जा रहा है। नए नियमों के तहत, स्पेक्ट्रम शुरू में पांच साल के लिए आवंटित होगा, जिसे दो साल तक बढ़ाया जा सकता है। यह ट्रायल आवंटन स्टारलिंक को व्यापक रोलआउट से पहले ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने और सुरक्षा परीक्षण में तेजी लाने में मदद करेगा।