नईदिल्ली (30 जुलाई 25)। भारत सरकार ने एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट कंपनी Starlink की सेवाओं को लेकर अहम फैसला लिया है। केंद्रीय दूरसंचार राज्यमंत्री पेम्मासानी चंद्रशेखर ने बताया कि भारत में Starlink को केवल 20 लाख उपयोगकर्ताओं को सेवा प्रदान करने की अनुमति दी गई है। साथ ही, इस सेवा की अधिकतम डाउनलोड स्पीड 200Mbps तक सीमित रहेगी। यह फैसला घरेलू टेलीकॉम कंपनियों जैसे BSNL पर असर पड़ने की आशंका को खारिज करते हुए लिया गया है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि Starlink की सेवाएं मुख्य रूप से ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में दी जाएंगी, जहां BSNL की मजबूत उपस्थिति है। हालांकि, Starlink की शुरुआती लागत महंगी होगी और ग्राहकों को मासिक शुल्क लगभग 3,000 रुपये तक देना पड़ सकता है। केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि BSNL की 4G सेवाओं का रोलआउट पूरी तरह से पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि फिलहाल टैरिफ बढ़ाने की कोई योजना नहीं है क्योंकि सरकार पहले बाजार में पकड़ मजबूत करना चाहती है। भारत की अंतरिक्ष एजेंसी INSPACe ने Starlink को देश में सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सेवा प्रदान करने का पांच वर्षों के लिए लाइसेंस प्रदान किया है। इसके बाद कंपनी अब अपने Starlink Gen1 Constellation के माध्यम से भारत में इंटरनेट सेवा शुरू कर सकती है। अब सिर्फ स्पेक्ट्रम फीस और दूरसंचार विभाग की मंजूरी बाकी है।