भोपाल (06 अक्टूबर 25)। उच्च, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने कहा है कि भारत की मान्यता में वसुधैव कुटुंबकम है। विश्व एक परिवार है, विश्व बाजार नहीं है। भारत ने कोविड के संकटकाल में विश्व के कई देशों को वैक्सीन उपलब्ध करवाकर वसुधैव कुटुंबकम के भारतीय दृष्टिकोण को विश्वमंच पर परिलक्षित किया है। भारत का पुरातन दर्शन व्यापक था, हर क्षेत्र-हर विधा में भारत में समृद्ध ज्ञान था। भारत विश्वमंच पर समृद्ध एवं सक्षम राष्ट्र था, हमारी गौरवशाली एवं समृद्धशाली परंपराएं रही हैं, जिन्हें हमारे पूर्वजों ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण के सापेक्ष शोध एवं अध्ययन कर समाज में स्थापित की। मंत्री श्री परमार सोमवार को भोपाल के श्यामला हिल्स स्थित केन्द्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान के पंडित सुंदरलाल शर्मा सभागृह में निजी विश्वविद्यालय संघ के तत्वावधान में आयोजित भारतीय ज्ञान परम्परा के विस्तार में निजी विश्वविद्यालयों के योगदान विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी के शुभारम्भ के बाद संबोधित कर रहे थे।
मंत्री परमार ने कहा कि कृतज्ञता का भाव, भारत की समृद्ध संस्कृति एवं परम्परा है। हमारे पूर्वजों ने प्रकृति एवं ऊर्जा स्रोतों के संरक्षण भाव से, समाज में कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए श्रद्धा के रूप में परम्परा स्थापित की। मंत्री परमार ने भारतीय ज्ञान परंपरा के कई अनछुए पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए विभिन्न क्षेत्रों, विषयों एवं विधाओं में भारतीय पुरातन ज्ञान के तथ्यात्मक उदाहरण प्रस्तुत किए। परमार ने बताया कि नालन्दा विश्वविद्यालय के दौर में शिक्षा, चिकित्सा, तकनीक, इंजीनियरिंग सहित प्रत्येक क्षेत्र में भारत, विश्वमंच पर सिरमौर था। भारत के समृद्ध ज्ञान को ग्रहण करने विश्व भर से लोग आते थे, इसलिए भारत विश्वगुरु कहलाता था। उच्च शिक्षा में प्रथम वर्ष के पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान परम्परा का समावेश किया गया है। मंत्री परमार ने कहा कि विश्वविद्यालयों के पुस्तकालयों को भारतीय ज्ञान परम्परा की संदर्भ पुस्तकों से समृद्ध करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारतीय गृहणियों की रसोई प्रबंधन, विश्व भर में आदर्श एवं उत्कृष्ट प्रबंधन का उदाहरण है। मंत्री परमार ने प्रधानमंत्री मोदी के स्वदेशी उत्पाद को अपनाने के संकल्प में सहभागिता करने का आह्वान भी किया। परमार ने कहा स्वदेशी आंदोलन से आत्मनिर्भर भारत का संकल्प सिद्ध होगा। परमार ने कहा कि हम सभी की सहभागिता एवं पुरुषार्थ से स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक भारत विश्व में सिरमौर बनेगा।