Wednesday, 30 Sep 2026

स्व. गोविन्द नारायण सिंह से लेनी चाहिए सीख: सीएम

भोपाल (26 जुलाई 26)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. गोविंद नारायण सिंह की जयंती पर शनिवार को मध्यप्रदेश विधानसभा के सेंट्रल हॉल में उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। पुष्पांजलि कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं पूर्व मुख्यमंत्री स्व. सिंह के परिजन उपस्थित थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राजनीति का उद्देश्य केवल सत्ता पाना नहीं, समाज का कल्याण करना है। आज की नई पीढ़ी को पूर्व मुख्यमंत्री स्व. गोविंद नारायण सिंह के जीवन से सेवा, समर्पण और नैतिकता की सीख लेनी चाहिए। वे बेहद सरल जीवन और सहज व्यवहार के लिए प्रसिद्ध थे। जनता से उनका सीधा संवाद उनकी सबसे बड़ी शक्ति था। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों और सामान्य नागरिकों की समस्याओं को निकट से समझा। ऐसे व्यक्तित्व सदैव समाज का मार्गदर्शन करते हैं। उनकी कार्यशैली आज भी जनप्रतिनिधियों के लिए प्रेरणास्रोत है। पूर्व मुख्यमंत्री स्व. सिंह का जीवन युवाओं को ईमानदारी, संघर्ष और राष्ट्र सेवा का संदेश देता है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि गोविन्द नारायण सिंह वर्ष 1967 में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने, जब प्रदेश की राजनीति एक नए दौर से गुजर रही थी। उन्होंने प्रशासन में जवाबदेही और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का प्रयास किया. लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने और जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप शासन चलाने की दिशा में कार्य किया। उनका कार्यकाल राजनीतिक परिवर्तन का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज पूर्व मुख्यमंत्री स्व. सिंह की जयंती पर हम सभी उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लें। उनके दिखाए मार्ग पर चलते हुए हम विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण के लिए कार्य करेंगे। प्रदेश में जनकल्याण, सुशासन और सतत् विकास के मार्ग पर लगातार आगे बढ़ना ही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी। पूर्व मुख्यमंत्री स्व. गोविंद नारायण सिंह का जन्म 25 जुलाई 1920 को रामपुर बघेलान में हुआ था। एम.ए., एलएलबी. तक शिक्षा ग्रहण कर उन्होंने अपने सार्वजनिक एवं राजनैतिक जीवन प्रारंभ किया। उन्होंने चतुर्थ विधानसभा (1967-1972) में 30 जुलाई 1967 से 12 मार्च 1969 तक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश के विकास को एक नई दिशा दी थी। श्री सिंह का 10 मई 2005 को देहावसान हो गया।

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