बेंगलुरु (15 मार्च 25)। कर्नाटक सरकार ने हाल ही में एक बड़ा निर्णय लिया है, जिससे राजनीतिक माहौल में हड़कंप मच गया है। राज्य सरकार ने मुस्लिम ठेकेदारों को सरकारी निविदाओं में 4 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रस्ताव पारित किया है। यह फैसला राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की अध्यक्षता में हुई एक कैबिनेट बैठक में लिया गया। इसके साथ ही कर्नाटक सरकार ने कर्नाटक ग्राम स्वराज और पंचायत राज (संशोधन) विधेयक को भी मंजूरी दी। इस फैसले से जहां एक तरफ मुस्लिम ठेकेदारों में खुशी की लहर है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया है।
कर्नाटक सरकार ने अब सरकारी निविदाओं में मुस्लिम ठेकेदारों के लिए 4 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शुक्रवार को कर्नाटक ट्रांसपेरेंसी इन पब्लिक प्रोक्योर्मेंट एक्ट में बदलाव का प्रस्ताव पेश किया, जिसे कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। इस बदलाव के बाद, अब एक करोड़ रुपये तक की निविदाओं में मुस्लिम ठेकेदारों को 4 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। यह निर्णय कर्नाटक के मुस्लिम ठेकेदारों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे उन्हें सरकारी टेंडर हासिल करने में कुछ हद तक सहूलियत हो सकती है। हालांकि, इस फैसले के राजनीतिक और कानूनी पहलू भी हैं, जिन पर बहस हो रही है।
कर्नाटक सरकार के इस फैसले के बाद, भाजपा ने कांग्रेस पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने शनिवार को एक प्रेस वार्ता में कहा कि कर्नाटक सरकार का यह कदम राहुल गांधी के पूर्ण समर्थन से लिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि यह कदम राहुल गांधी की 'मानसिकता' को दर्शाता है और कांग्रेस केवल एक समुदाय को खुश करने के लिए ऐसे फैसले ले रही है। रविशंकर प्रसाद ने कहा, 'कर्नाटक सरकार ने इस फैसले को पारित करने से पहले यह सुनिश्चित किया कि राहुल गांधी का पूरा समर्थन हो।' इसके साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेता ऐसे निर्णयों के माध्यम से देश में धार्मिक असंतुलन को बढ़ावा दे रहे हैं।