Thursday, 01 Oct 2026

हिजबुल्लाह पर इजरायल का कड़ा रुख

यरुशलम (02 जुलाई 26)। इजरायल की उप विदेश मंत्री शैरन हास्केल ने कहा है कि लेबनान में स्थायी शांति और स्थिरता तभी संभव है, जब हिजबुल्लाह जैसे सशस्त्र समूहों का प्रभाव समाप्त हो और उनका निरस्त्रीकरण किया जाए। उन्होंने कहा कि भारत भी सीमा पार आतंकवाद का सामना कर चुका है, इसलिए वह इस वास्तविकता को अच्छी तरह समझता है। बातचीत में शैरन हास्केल ने कहा,  'हम हमेशा शांति और स्थिरता की उम्मीद करते हैं। लेकिन स्थायी शांति का एकमात्र रास्ता आतंकवादी समूहों को समाप्त करना है। भारत के लोग भी इसे अच्छी तरह समझते हैं।'  यह टिप्पणी उन्होंने अमेरिका की मध्यस्थता में घोषित इजरायल-लेबनान त्रिपक्षीय ढांचे के संदर्भ में की।

जब उनसे पूछा गया कि क्या इस समझौते के बावजूद इजरायल लेबनान में सैन्य अभियान जारी रखेगा, तो उन्होंने कहा कि यह ढांचा सहयोग का माध्यम है, लेकिन यदि लेबनानी सेना हिजबुल्लाह के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने में सक्षम नहीं होती, तो इजरायल अपनी सुरक्षा के लिए कदम उठाएगा।  उनके अनुसार, यह समझौता सहयोग की रूपरेखा देता है। लेकिन यदि सुरक्षा खतरे बने रहते हैं, तो इजरायल कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित रखेगा। शैरन हास्केल ने स्वीकार किया कि सहयोगी देशों के बीच नीतिगत मतभेद होना असामान्य नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इजरायल के हितों की रक्षा कर रहे हैं, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं। हालांकि, उनके अनुसार दोनों देशों का व्यापक उद्देश्य समान है।  ईरान और अमेरिका के बीच जारी तकनीकी वार्ता पर टिप्पणी करते हुए हास्केल ने कहा कि उन्हें इस प्रक्रिया से अधिक उम्मीद नहीं है। उन्होंने ईरान को "हिंसक और आक्रामक शासन" बताते हुए कहा कि भारत को भी इस स्थिति पर सतर्क रहना चाहिए।

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