नईदिल्ली (13 मार्च 25)। 14 मार्च, 2025 को साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण (टोटल लूनर एक्लिप्स) होगा, लेकिन यह भारत में दिखाई नहीं देगा। चंद्र ग्रहण के दौरान सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीध में आकर चंद्रमा पर अपनी छाया डालते हैं, जिससे चंद्रमा लालिमा (ब्लड मून) दिखने लगता है। यह घटना खगोलीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है और ज्योतिष तथा आध्यात्मिक दृष्टि से भी खास मानी जाती है। हालांकि, यह ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा, लेकिन इसका प्रभाव कुछ धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताओं पर पड़ सकता है।
चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। चंद्र ग्रहण को लेकर कई धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताएं हैं। खासकर होली के दिन होने वाला पूर्ण चंद्र ग्रहण एक दुर्लभ खगोलीय घटना है, जिसमें चंद्रमा लाल रंग का दिखता है। इस प्रकार के ग्रहण को 'ब्लड मून' भी कहा जाता है। इस ग्रहण को ज्योतिष के अनुसार शुभ और अशुभ दोनों प्रकार से देखा जाता है। हालांकि यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, क्योंकि ग्रहण का मुख्य क्षेत्र भारत से बाहर होगा। चंद्र ग्रहण का समय सुबह 9:30 बजे से लेकर दोपहर 3:30 बजे तक रहेगा, लेकिन भारत में यह दृश्य नहीं होगा। इसलिए, सूतक काल (ग्रहण के पहले और बाद की अवधि) भी मान्य नहीं होगा, और लोग अपनी सामान्य दिनचर्या को जारी रख सकते हैं।