वाराणसी (06 नवंबर 25)। कार्तिक पूर्णिमा की रात काशी ने एक बार फिर अद्भुत और दिव्य नजारा पेश किया। गंगा तट पर करीब 20 लाख दीपों की स्वर्णिम आभा ने ऐसा दृश्य बनाया कि मानो धरती पर स्वर्ग उतर आया हो। नमो घाट से लेकर अस्सी घाट तक हर जगह दीपों की कतारें, रंगोली, संगीत और आरती की गूंज से पूरा शहर आस्था और सौंदर्य में डूबा नजर आया। शाम 5:30 बजे जैसे ही पहला दीया जला, देखते ही देखते सभी 88 घाटों और 96 कुंडों पर दीयों की श्रृंखला शुरू हो गई। गंगा पार रेती पर तीन लाख दीये और वरुणा नदी के तट पर 50 हजार दीये जलाए गए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने मंत्रिमंडल के कई सहयोगियों, पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह सहित, क्रूज़ के जरिए नमो घाट से अस्सी घाट तक घाटों की सुंदरता का अवलोकन किया। इस दौरान घाटों को झालरों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया था, जबकि हर घाट की थीम अलग रखी गई कहीं भगवान शिव की झांकी, तो कहीं 'आई लव काशी' की चमक। नमो घाट, दशाश्वमेध घाट, शीतला घाट और अस्सी घाट पर विशेष गंगा आरती हुई। नमो घाट पर यह पहली बार देव दीवाली के अवसर पर आयोजित की गई। आरती शाम 6 बजे से 6:50 बजे तक चली, जिसमें 21 अर्चक और 42 देव कन्याओं ने पारंपरिक विधि से पूजा-अर्चना की। चेत सिंह घाट पर इस बार लेजर शो ने सबका दिल जीत लिया। तीन चरणों में हुए इस शो में भगवान शिव से जुड़ी पौराणिक कथाओं को आधुनिक तकनीक से प्रदर्शित किया गया। वहीं, ललिता घाट के सामने हुई ग्रीन आतिशबाजी ने पूरी रात को और अधिक रोमांचक बना दिया।