नईदिल्ली (05 अगस्त 26)। भगोड़े अपराधियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में, 2019 से अब तक 36 देशों से 274 भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाया गया है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 'भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम' लागू हुआ। गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में, भारत ने भगोड़ों के खिलाफ एक एकीकृत, खुफिया-आधारित और प्रौद्योगिकी-संचालित मॉडल विकसित किया है, जिससे भगोड़ों के खिलाफ सख्ती बरतते हुए उन्हें वापस लाने का रास्ता साफ हुआ।
2014 से पहले प्रत्यर्पण के कानून कालबाह्य हो गए थे और केवल 37 देशों के साथ प्रत्यर्पण संधियां थीं। आर्थिक भगोड़ों को पकड़ने और उनकी संपत्ति जब्त करने के लिए कोई अलग कानून नहीं था। 2004 से 2013 के बीच एक वर्ष में औसतन केवल 4 भगोड़ों का प्रत्यर्पण होता था जबकि 110 अनुरोध लंबित थे। इसके अलावा, अधूरे दस्तावेज और धीमी कार्यवाही के कारण प्रत्यर्पण प्रक्रिया बहुत जटिल हो गई थी और विदेशी अदालतें भी प्रत्यर्पण की अनुमति नहीं देती थीं। साथ ही, कानूनी एवं न्यायिक बाधाओं जैसे, दोहरे अभियोजन से बचाव और दोहरे अपराध के सिद्धांत के कारण भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध रद्द किए जाते थे। गृह मंत्रालय और अन्य विभागों में समन्वय और एकीकृत रणनीति का अभाव भी था और भगोड़ों की जानकारी साझा करना, लोकेशन ट्रैकिंग, रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने जैसे कार्य धीमी गति से चलते थे।
भगोड़ों को वापस लाने को लेकर पहले की सरकारों में पॉलिटिकल विल का अभाव था, मोदी सरकार ने भगोड़ों के प्रत्यर्पण को 'राष्ट्रीय प्राथमिकता' बनाया। प्रधानमंत्री मोदी के विजन के अनुरूप, केन्द्रीय गृह मंत्री ने भगोड़ों के खिलाफ तीन स्तंभों पर जोर दिया है- वैश्विक अभियान, मजबूत समन्वय और स्मार्ट कूटनीति। अमित शाह ने भगोड़े अपराधियों के मुद्दे को देश की संप्रभुता, आर्थिक स्थिरता, कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ बताया है। मोदी सरकार 2019 में NIA संशोधन अधिनियम और UAPA संशोधन अधिनियम लेकर आई और 2020 के बाद भगोड़ों को भारत वापस लाने की प्रक्रिया को 'मिशन मोड' में आगे बढ़ाया गया। इससे कार्रवाई केवल संगठनों तक सीमित नहीं रही बल्कि व्यक्तिगत आतंकी, हैंडलर्स, फंडिंग नेटवर्क और विदेशों में बैठे सपोर्ट सिस्टम तक कार्रवाई का दायरा बढ़ा।