नईदिल्ली (31 मार्च 26)। नई दिल्ली में संसद के उच्च सदन राज्यसभा में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक 2026 को लेकर जोरदार बहस देखने को मिली। विपक्षी दलों ने इस बिल पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे या तो वापस लेने या सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग की है। बहस के दौरान संजय सिंह ने साफ कहा कि उनकी पार्टी इस बिल का समर्थन नहीं करती और इसे विस्तृत जांच के लिए सेलेक्ट कमेटी को भेजा जाना चाहिए। वहीं रामगोपाल यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह विधेयक व्यावहारिक नहीं है और इससे नुकसान हो सकता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं करती, तो बाकी सुझावों पर क्या ध्यान देगी। दिग्विजय सिंह ने इस बिल को 'अर्धसैनिक बलों के खिलाफ' बताते हुए कहा कि यह सुधार नहीं बल्कि व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाला कदम है। कांग्रेस ने भी इसे वापस लेने या सेलेक्ट कमेटी को भेजने की मांग दोहराई।
CAPF Bill 2026 क्या है? -यह विधेयक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के पांच प्रमुख बलों- CRPF, BSF, CISF, ITBP और SSB में प्रशासनिक ढांचे को एकरूप बनाने के उद्देश्य से लाया गया है। सरकार का दावा है कि इससे भर्ती, पदोन्नति और सेवा शर्तों में स्पष्टता और पारदर्शिता आएगी, जिससे लंबे समय से चले आ रहे विवाद खत्म हो सकेंगे। प्रस्तावित कानून के तहत शीर्ष पदों पर IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति का प्रावधान बरकरार रखा गया है। IG स्तर पर लगभग 50% पद, ADG स्तर पर 67% से अधिक और DG स्तर के पद IPS अधिकारियों के लिए आरक्षित रहेंगे। इसके अलावा, सरकार को नियम तय करने और नोटिफाई करने का अधिकार मिलेगा, जिससे पूर्व में दिए गए अदालती फैसलों के प्रभाव पर भी असर पड़ सकता है।
इस बिल को लेकर सबसे बड़ा विवाद IPS अधिकारियों और CAPF कैडर के बीच लंबे समय से चल रहे वर्चस्व के मुद्दे से जुड़ा है। CAPF के अधिकारी मानते हैं कि वे पूरी सेवा अपने बल में देते हैं, इसके बावजूद शीर्ष पदों पर बाहर से आने वाले IPS अधिकारियों को प्राथमिकता मिलती है, जिससे उनके प्रमोशन के अवसर सीमित हो जाते हैं। सरकार का कहना है कि यह विधेयक सुरक्षा बलों की कार्यक्षमता को बढ़ाने और प्रशासनिक प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए जरूरी है। इसके जरिए प्रमोशन सिस्टम को स्पष्ट और पारदर्शी बनाया जाएगा, जिससे भविष्य में विवाद कम होंगे। विपक्ष के कड़े विरोध के बावजूद सरकार इस बिल को पास कराने के लिए प्रयास कर रही है। अगर यह विधेयक पारित हो जाता है, तो केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की संरचना और नेतृत्व प्रणाली में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल यह बिल संसद में चर्चा के दौर से गुजर रहा है और अंतिम फैसला आगे की कार्यवाही पर निर्भर करेगा।