नईदिल्ली (10 मार्च 26)। सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों को नियंत्रित करने से जुड़े आईटी नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने उस आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसमें बॉम्बे हाई कोर्ट ने 2023 के सूचना प्रौद्योगिकी नियमों में किए गए कुछ संशोधनों को असंवैधानिक करार दिया था। इन संशोधनों के तहत केंद्र सरकार को फैक्ट चेक यूनिट बनाने का अधिकार दिया गया था, जो सरकारी कामकाज से जुड़ी फर्जी या भ्रामक जानकारी की पहचान कर सोशल मीडिया से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर सकती थी।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने की। इस पीठ में जस्टिस आर. महादेवन और जस्टिस जॉयमाल्या बागची भी शामिल थे। सुनवाई के दौरान अदालत ने मूल याचिकाकर्ताओं, जिनमें कॉमेडियन कुणाल कामरा, एडिटर गिल्ट ऑफ इंडिया औरएसोसिएशन इंडियन मैगज़ीन्स शामिल हैं, को नोटिस जारी किया। केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हाई कोर्ट के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया। सुनवाई के दौरान CJI ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के कामकाज को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कुछ प्लेटफॉर्म्स पर ऐसी सामग्री तेजी से फैल रही है जो देश की सुरक्षा या नीतियों को नुकसान पहुंचा सकती है, खासकर भारतीय सेना से जुड़ी गलत जानकारी के मामले में। उन्होंने कहा कि राष्ट्रहित और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने कहा कि मौजूदा आईटी नियमों में पहले से ही ऐसी व्यवस्था है जिसके तहत विवादित सामग्री को 24 घंटे के भीतर हटाया जा सकता है। उन्होंने तर्क दिया कि 2023 के संशोधनों में “भ्रामक जानकारी” की स्पष्ट परिभाषा नहीं दी गई, जिससे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और अन्य मध्यस्थों पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है।