Wednesday, 30 Sep 2026

H-1B: अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए मुश्किलें बढ़ी

वाशिंगटन (10 अप्रैल 25)। अमेरिका में पढ़ाई कर रहे लाखों अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं, खासकर भारतीय छात्रों के लिए, जो हाल ही में प्रस्तावित एक नए बिल के कारण चिंतित हैं। इस बिल में अमेरिका के लोकप्रिय Optional Practical Training कार्यक्रम को खत्म करने का सुझाव दिया गया है। यह कार्यक्रम विदेशी छात्रों को पढ़ाई पूरी करने के बाद सीमित समय के लिए अमेरिका में काम करने की अनुमति देता है। वर्तमान में, इस व्यवस्था के तहत अधिकांश छात्रों को स्नातक के बाद एक वर्ष तक काम करने की अनुमति मिलती है, जबकि STEM (विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित) क्षेत्रों से जुड़े छात्रों को अतिरिक्त 24 महीनों का विस्तार भी मिल सकता है। इस सुविधा के जरिए वे अमेरिका में उद्योग जगत का अनुभव लेते हैं और कई बार आगे की वीजा प्रक्रिया जैसे H-1B के लिए खुद को मजबूत स्थिति में पाते हैं।

भारत से अमेरिका में पढ़ने वाले लगभग तीन लाख से ज्यादा छात्र इस OPT प्रोग्राम पर निर्भर हैं। यदि यह बिल कानून बनता है, तो हजारों छात्रों को डिग्री पूरी करने के तुरंत बाद अमेरिका छोड़ना पड़ सकता है। इसके बाद यदि वे अमेरिका में काम करना चाहेंगे तो उन्हें H-1B वीजा के लिए आवेदन करना होगा, जिसकी प्रक्रिया न केवल जटिल है बल्कि इसमें चयन भी पूरी तरह से लॉटरी प्रणाली पर निर्भर करता है। छात्रों और शिक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक यह कदम अमेरिकी उच्च शिक्षा की आकर्षण शक्ति को कमजोर कर सकता है, क्योंकि बड़ी संख्या में विदेशी छात्र अमेरिका की ओर रुख करते हैं केवल इसलिए कि उन्हें वहां पढ़ाई के बाद काम करने का अवसर मिलता है। यदि यह विकल्प बंद हो गया, तो संभव है कि छात्र कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन या अन्य यूरोपीय देशों की ओर रुख करें, जहां पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा की नीतियां तुलनात्मक रूप से अधिक अनुकूल हैं।

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