भोपाल (08 जून 26)। मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव में दो सीटों पर भाजपा की जीत लगभग तय मानी जा रही है, जबकि तीसरी सीट कांग्रेस के खाते की है। हालांकि भाजपा की नजर अब इस सीट पर भी है और उन्होंने महेश केवट को अपना तीसरा प्रत्याशी घोषित भी कर दिया है, जिससे राज्यसभा की लड़ाई रोचक मोड़ पर पहुंच गई है।
विधानसभा के मौजूदा गणित के अनुसार मध्यप्रदेश में कुल 230 विधायक हैं, लेकिन विजयपुर से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा को मतदान का अधिकार नहीं है और दतिया सीट रिक्त है। ऐसे में प्रभावी विधायकों की संख्या 228 रह जाती है। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 57 वोटों की आवश्यकता होगी।
भाजपा के पास 163 विधायक हैं। वह 57-57 वोटों के आधार पर दो सीटें आसानी से जीत सकती है, जिसके बाद उसके पास 49 वोट बचेंगे। कांग्रेस के पास 66 विधायक हैं, जबकि एक विधायक आदिवासी पार्टी का है। ऐसे में कांग्रेस की सीट पर कब्जा जमाने के लिए भाजपा को केवल 8 अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। यही वजह है कि कांग्रेस के भीतर संभावित क्रॉस वोटिंग और असंतोष की चर्चाएं तेज हो गई हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने विधायकों को एकजुट रखने की कवायद शुरू कर दी है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में क्रॉस वोटिंग की अटकलें लगातार बनी हुई हैं।
इसी बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा पहले भी खरीद-फरोख्त की राजनीति करती रही है और उसके पास विधायकों को खरीदने के लिए अथाह संसाधन हैं। पटवारी ने भाजपा को चेतावनी देते हुए कहा कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन किया जाए, अन्यथा कांग्रेस 'ईंट का जवाब पत्थर से देगी।' राज्यसभा चुनाव की तारीख नजदीक आने के साथ ही दोनों प्रमुख दलों की रणनीतियां तेज हो गई हैं। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रख पाएगी या फिर भाजपा तीसरी सीट के लिए आवश्यक समर्थन जुटाने में सफल होगी।