नईदिल्ली (15 दिसंबर 24)। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि भारतीय रिज़र्व बैंक ने कृषि क्षेत्र की सहायता के लिए कृषि संबंधी सहायक कार्यों के लिए ऋण और बढ़ती लागतों को पूरा करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अतिरिक्त कृषि ऋणों की सीमा में वृद्धि की घोषणा की है। प्रति उधारकर्ता 1.6 लाख रुपये की वर्तमान ऋण सीमा को बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दिया गया है। यह निर्णय किसानों पर मुद्रास्फीति और कृषि की बढ़ती लागत के प्रभाव के कारण से किया गया है। इसका उद्देश्य किसानों को बेहतर वित्तीय पहुँच प्रदान करना है और यह सुनिश्चित करना कि उनके पास बिना प्रतिभूति की समास्या के अपनी परिचालन और विकासात्मक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन हों। 1 जनवरी, 2025 से प्रभावी, देश भर के बैंकों को निर्देश दिया जाता है कि वे 2 लाख रुपये तक प्रति उधारकर्ता को कृषि संबंधी सहायक कार्यों सहित कृषि ऋणों के लिए अतिरिक्त प्रतिभूति और मार्जिन आवश्यकताओं को माफ करें। कृषक समुदाय को समय पर वित्तीय सहायता सुनिश्चित करने के लिए संशोधित दिशा-निर्देशों को शीघ्रता से लागू करें। बैंकों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने परिचालन क्षेत्र के किसानों और हितधारकों के बीच अधिकतम पहुंच और जागरूकता सुनिश्चित करने के लिए इन परिवर्तनों का व्यापक प्रचार करें।यह कदम विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों (क्षेत्र के 86% से अधिक) के लिए ऋण पहुंच को बढ़ाता है। ये कम उधार लागत और अतिरिक्त आवश्यकताओं को हटाने से लाभान्वित होते हैं। ऋण वितरण को सुव्यवस्थित करके। इस पहल से किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋणों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है जिससे किसानों को कृषि कार्यों में निवेश करने और अपनी आजीविका में सुधार करने में सहायता मिलेगी।