नईदिल्ली (02 मई 26)। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने खेड़ा को अग्रिम जमानत दे दी है। इस मामले में 30 अप्रैल 2026 को लंबी बहस के बाद जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस ए.एस. चंदुरकर की खंडपीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। कोर्ट ने यह फैसला दोनों पक्षों की दलीलों और कानूनी पहलुओं पर विचार करने के बाद अपना निर्णय सुनाया। पवन खेड़ा ने कानूनी कार्यवाही के खिलाफ शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जहाँ से अब उन्हें गिरफ्तारी से सुरक्षा मिल गई है।
पवन खेड़ा की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने असम सरकार के रुख की कड़ी आलोचना की। सिंघवी ने कहा कि यदि डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने किसी संवैधानिक पदाधिकारी को 'संवैधानिक चरवाहे' की तरह व्यवहार करते देखा होता, तो वे व्यथित हो जाते। उन्होंने तर्क दिया कि मानहानि के मामले में हिरासत में लेकर पूछताछ की कोई आवश्यकता नहीं है। खेड़ा के देश छोड़कर भागने का कोई खतरा नहीं है, तो फिर उन्हें गिरफ्तार कर अपमानित क्यों किया जा रहा है? सिंघवी ने दावा किया कि जालसाजी (धारा 339, BNS) के आरोप बाद में दुर्भावनापूर्ण तरीके से जोड़े गए, जबकि मूल प्राथमिकी में इनका उल्लेख नहीं था।
असम सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हिरासत में पूछताछ का समर्थन किया। मेहता ने आरोप लगाया कि यह मामला आधिकारिक दस्तावेजों के फर्जी निर्माण से जुड़ा है। जांच में सामने आया है कि पासपोर्ट सील और क्यूआर कोड जैसे आधिकारिक चिह्नों के साथ छेड़छाड़ की गई है। उन्होंने कहा कि यह पता लगाना जरूरी है कि ये दस्तावेज किसने तैयार किए और क्या इस साजिश में अन्य लोग या कोई "विदेशी लिंक" भी शामिल है, विशेषकर चुनाव के समय। उन्होंने आरोप लगाया कि खेड़ा जांच से बच रहे हैं और अधिकारियों की पहुंच से बाहर रहकर वीडियो जारी कर रहे हैं।