Tuesday, 29 Sep 2026

SC ने समय रैना, रणवीर इलाहाबादिया को फटकारा

नईदिल्ली (15 जुलाई 26)। उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कॉमेडियन समय रैना तथा यूट्यूबर रणवीर इलाहाबादिया और आशीष चंचलानी को उसके आदेश का पालन न करने पर फटकार लगाते हुए कहा कि वे युवाओं के स्वयंभू आदर्श (यूथ आइकन) हैं। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की खंडपीठ ने यह आदेश तब दिया, जब उन्हें बताया गया कि रैना ने अपने शो में किसी भी दिव्यांग व्यक्ति को आमंत्रित नहीं किया, जैसा कि पिछले आदेश में उससे कहा गया था। 

खंडपीठ ने कहा, 'हमें इस बात में कोई संदेह नहीं है कि समय रैना ने अदालत को गुमराह किया है। उसने इस अदालत के सामने दिए गए बयानों/शपथ पत्रों का खुलेआम उल्लंघन किया है।' पीठ ने कहा, 'यह कहकर इस कदाचार पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है कि कल एक अनुपालन हलफनामा दायर किया गया था, जबकि वास्तव में कोई हलफनामा दायर नहीं किया गया है।' प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) ने टिप्पणी की कि वे सोचते हैं कि देश से बाहर बैठकर वे (अदालत के) क्षेत्राधिकार से बाहर हैं। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, 'अब उन्हें भुगतने दीजिए। अगर यह अहंकार नहीं है, तो फिर हमें ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी (शब्दकोश) को ही बदलना पड़ेगा। उच्चतम न्यायालय 'क्योर एसएमए इंडिया फाउंडेशन' की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें आरोप लगाया गया है कि समय रैना ने 'स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी' (एसएमए-मांसपेशी एवं तंत्रिका से जुड़ी आनुवंशिक बीमारी) के इलाज की अत्यधिक लागत को लेकर असंवेदनशील टिप्पणी की थी। याचिका में यह भी आरोप है कि उसने इस बीमारी से पीड़ित एक व्यक्ति का कथित तौर पर मजाक उड़ाया था। सुनवाई के दौरान संगठन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने शीर्ष अदालत को बताया कि समय रैना ने अपने किसी भी शो में शामिल होने के लिए संगठन से कभी संपर्क नहीं किया।

याचिका में 'इंडियाज़ गॉट लैटेंट' के मेजबान समय रैना और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर विपुल गोयल, बलराज परमजीत सिंह घई, सोनाली ठक्कर तथा निशांत जगदीश तनवर द्वारा किए गए कथित आपत्तिजनक चुटकुलों एवं टिप्पणियों का भी उल्लेख किया गया है। दिव्यांगजनों की गरिमा की रक्षा के लिए सख्त कानून की आवश्यकता पर जोर देते हुए उच्चतम ने बृस्पतिवार को केंद्र सरकार से कहा था कि वह ऐसा कानून बनाने पर विचार करे, जिसके तहत दिव्यांग व्यक्तियों और दुर्लभ आनुवंशिक (जेनेटिक) बीमारियों से पीड़ित लोगों का अपमान करने या उनका मजाक उड़ाने जैसी टिप्पणियों को दंडनीय अपराध बनाया जाए।

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