नईदिल्ली (13 अप्रैल 26)। उच्चतम न्यायालय ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR ) प्रक्रिया के तहत पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से अपने नाम हटाए जाने के खिलाफ 13 लोगों द्वारा दायर याचिका पर सोमवार को सुनवाई से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जिनका नाम स्पेशल इंटेंसिव रिव्यू के दौरान वोटर लिस्ट से कट गया था। अदालत को सूचित किया गया था कि 11 अप्रैल तक पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से नामों को खारिज किए जाने या हटाए जाने के खिलाफ 34 लाख 35 हजार 174 अपीलें दायर की गई थीं।
याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि मतदाताओं को बिना किसी उपाय के नहीं छोड़ा जाना चाहिए, खासकर ये है कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए मतदान 23 अप्रैल को होगा। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिका को ''समय पूर्व'' करार देते हुए पीड़ित पक्षों को स्थापित अपीलीय न्यायाधिकरणों से संपर्क करने का निर्देश दिया। इसने कहा, 'चूंकि याचिकाकर्ता (कुरैशा यास्मीन और अन्य) पहले ही अपीलीय न्यायाधिकरणों से संपर्क कर चुके हैं... हमारी राय में, याचिका में व्यक्त आशंकाएं समय पूर्व हैं।' पीठ ने यह भी कहा कि उसने याचिका के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि निर्वाचन आयोग ने उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना मनमाने ढंग से नाम हटाए हैं, और इसके खिलाफ दायर अपील पर समय पर सुनवाई नहीं की जा रही।
कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने मतदाता सूची से नाम हटाने के खिलाफ अपील पर निर्णय लेने के लिए उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों की अध्यक्षता में 19 न्यायाधिकरणों का गठन किया है। निर्वाचन आयोग की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता डी एस नायडू ने अदालत को सूचित किया कि वर्तमान में लगभग 30 से 34 लाख अपील लंबित हैं। पीठ ने कहा, 'प्रत्येक न्यायाधिकरण के पास अब निपटाने के लिए एक लाख से अधिक अपील हैं।'