Wednesday, 07 Oct 2026

Supreme Court को 'सुप्रीम' कहलाने का अधिकार नहीं: मदनी

भोपाल (30 नवंबर 25)। जमीयत की गवर्निंग बॉडी की बैठक में मौलाना महमूद असद मदनी ने सुप्रीम कोर्ट की कार्यप्रणाली और इबादतगाह मामलों को लेकर सवाल उठाए। मदनी ने कहा कि बाबरी मस्जिद और तलाक जैसे मामलों में अदालतों पर सरकार का प्रभाव साफ दिखाई देता है। उन्होंने ज्ञानवापी और मथुरा मामलों पर भी चिंता व्यक्त की।

मदनी ने मुस्लिम समुदाय से निराशा से बचने की अपील की और जिहाद को लेकर फैलाई जा रही गलतफहमियों पर प्रकाश डाला। उनका कहना था कि जिहाद किसी हिंसा का नहीं बल्कि इंसानियत, समाज और जुल्म के खिलाफ खड़े होने का पवित्र कर्तव्य है। ‘जब-जब जुल्म होगा, तब-तब जिहाद होगा,’ उन्होंने स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि जिहाद व्यक्तिगत बदले की कार्रवाई नहीं है और इसका फैसला केवल शरीयत आधारित शासन कर सकता है। भारत एक लोकतांत्रिक देश है, इसलिए यहां इस्लामी शासन लागू नहीं होता। मदनी ने समुदाय से एकजुट होकर अपने अधिकारों की रक्षा करने का संदेश दिया। वहीं वंदे मातरम पर उनके विवादित बयान पर मुस्लिम संगठनों में मतभेद देखने को मिला। मदनी ने कहा कि किसी भी नारे या गीत को किसी कौम पर थोपना सही नहीं है। उन्होंने कहा, ‘मुर्दा कौमें सरेंडर करती हैं, जबकि जिंदा कौमें हालात का मुकाबला करती हैं।’

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