नईदिल्ली (18 अगस्त 26)। परीक्षा प्रश्नपत्रों में त्रुटियों के कारण यूजीसी-नेट के तीन विषयों की दोबारा परीक्षा कराने को लेकर आलोचना झेल रही राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने सोमवार को व्यवस्था में सुधार के लिए 50 से अधिक कर्मचारियों को हटा दिया और प्रमुख पदों पर पेशेवरों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ जब रविवार रात दोबारा परीक्षा की घोषणा के बाद विपक्षी दलों और कई छात्र संगठनों ने एनटीए के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इन संगठनों ने सोमवार को यहां प्रदर्शन करते हुए एनटीए को भंग करने की मांग की और कहा कि उसकी ''बार-बार की चूकों'' से छात्रों की शैक्षणिक और करियर संबंधी योजनाएं प्रभावित हुई हैं। एनटीए के सूत्रों ने हालांकि कहा कि एजेंसी ने छात्रों के हित में कदम उठाया है और भविष्य में सभी परीक्षाओं को निष्पक्ष एवं त्रुटिरहित बनाने के लिए आंतरिक प्रक्रियाओं और प्रोटोकॉल की समीक्षा की जा रही है। सूत्रों ने कहा कि एजेंसी ने शिकायतों पर सक्रियता से गौर किया और दोबारा परीक्षा कराने का फैसला किया। सभी सुधारात्मक कदम उम्मीदवारों के व्यापक हित और अधिक जवाबदेह परीक्षा व्यवस्था की नींव मजबूत करने के लिए उठाए जा रहे हैं।
शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने उच्च शिक्षा विभाग के सचिव, एनटीए के महानिदेशक और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। जोशी को यह जिम्मेदारी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद मिली थी। प्रधान को राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी) 2026 परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक को लेकर व्यापक छात्र प्रदर्शनों के बीच पद छोड़ना पड़ा था। शिक्षा मंत्रालय ने कहा कि जोशी को हालिया घटनाक्रम के बाद एनटीए द्वारा उठाए गए कदमों तथा समग्र परीक्षा व्यवस्था में सुधार के बारे में जानकारी दी गई। मंत्रालय ने बताया कि उन्हें सूचित किया गया कि एनटीए से 50 से अधिक कर्मचारियों को हटाया गया है। इसके अलावा, मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी, मुख्य वित्त अधिकारी, मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारी (सीआईएसओ), महाप्रबंधक (परीक्षा सुरक्षा) और महाप्रबंधक (अनुसंधान एवं विकास तथा साइकोमेट्रिक्स) सहित 10 नए पेशेवर पदों के लिए विज्ञापन जारी किए गए हैं और नियुक्तियां की जा रही हैं।