नईदिल्ली (22 फरवरी 26)। भारत ने डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में कई बड़े देशों को पीछे छोड़ दिया है। अब कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं मानने लगी हैं कि भारत का यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस यानी Unified Payments Interface (UPI) न सिर्फ सफल है, बल्कि इसने यह भी साबित कर दिया है कि एक सरकारी मॉडल दुनिया के बड़े प्राइवेट नेटवर्क्स को चुनौती दे सकता है। इंटरेस्ट.को.एनजेड की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जहां अमेरिका के Visa और Mastercard जैसे पेमेंट नेटवर्क प्रीमियम प्राइवेट सेवाओं के तौर पर काम करते हैं, वहीं भारत ने डिजिटल पेमेंट सिस्टम को पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में विकसित किया है। यूपीआई की खास बात यह है कि यह आम लोगों के लिए लगभग मुफ्त सेवा है। छोटे दुकानदार से लेकर बड़े व्यापारियों तक, हर कोई इसका इस्तेमाल कर सकता है। इससे डिजिटल लेनदेन आसान, तेज और सुरक्षित हुआ है।रिपोर्ट में Reserve Bank of India (RBI) के आंकड़ों का जिक्र किया गया है। इनके अनुसार, भारत के कुल डिजिटल भुगतानों में यूपीआई की हिस्सेदारी 80 फीसदी से ज्यादा हो चुकी है। साल 2017 में जहां यूपीआई के यूजर्स करीब 3 करोड़ थे, वहीं 2024 तक यह संख्या 4 करोड़ से ज्यादा हो गई। सबसे बड़ी बात यह है कि भारत में हर साल 170 अरब (170 बिलियन) से ज्यादा यूपीआई ट्रांजेक्शन हो रहे हैं। एक अरब से अधिक आबादी वाले देश में यह आंकड़ा डिजिटल क्रांति की बड़ी मिसाल माना जा रहा है। रिपोर्ट में भारत के यूपीआई की तुलना चीन के Alipay और WeChat Pay से की गई है। चीन के ये सिस्टम 'क्लोज्ड वॉल' मॉडल पर आधारित हैं, यानी वे सीमित दायरे में काम करते हैं। जबकि भारत का यूपीआई एक ओपन प्लेटफॉर्म है। इसका मतलब है कि कोई भी बैंक या फिनटेक कंपनी इससे जुड़ सकती है और अपने ग्राहकों को सेवा दे सकती है। इसी खुले और सरल मॉडल की वजह से यूपीआई तेजी से लोकप्रिय हुआ है। भारत ने यह साबित कर दिया है कि कम लागत में भी बड़े स्तर पर डिजिटल सेवाएं दी जा सकती हैं। यूपीआई न सिर्फ देश में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि दुनिया के लिए एक नया बेंचमार्क भी तय कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में वैश्विक डिजिटल वित्तीय व्यवस्था में भारत की भूमिका और मजबूत होगी। डिजिटल फाइनेंशियल “हाइवे” का बड़ा हिस्सा भारत से होकर गुजर सकता है।