नईदिल्ली (13 दिसंबर 24)। उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए देश की सभी अदालतों को 1991 के कानून के तहत धार्मिक स्थलों के सर्वेक्षण सहित राहत मांगने वाले किसी भी मुकदमे पर विचार करने और कोई भी प्रभावी अंतरिम या अंतिम आदेश पारित करने से रोक दिया। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की पीठ ने यह निर्देश पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 से संबंधित याचिकाओं और प्रतिवाद याचिकाओं पर दिया। 1991 का कानून किसी भी पूजा स्थल के धार्मिक स्वरूप में परिवर्तन पर रोक लगाता है तथा किसी भी पूजा स्थल के धार्मिक स्वरूप को उसी रूप में बनाए रखने का प्रावधान करता है जैसा वह 15 अगस्त, 1947 को था। उल्लेखनीय है कि पीठ ने कहा कि उसके अगले आदेश तक कोई नया मुकदमा दायर या पंजीकृत नहीं किया जाएगा तथा लंबित मामलों में अदालतें उसके अगले आदेश तक कोई भी 'प्रभावी अंतरिम या अंतिम आदेश' देने से बचेंगी। पीठ ने कहा, 'हम 1991 के अधिनियम की शक्तियों, स्वरूप और दायरे की जांच कर रहे हैं।' साथ ही, यह भी कहा कि अन्य सभी अदालतों से इस मामले में हाथ न डालने को कहना उचित होगा।हिंदू पक्ष की ओर से पेश हुए कई वकीलों ने इस आदेश का विरोध करते हुए कहा कि उन्हें सुने बिना यह आदेश पारित नहीं किया जाना चाहिए।