नईदिल्ली (13 दिसंबर 24)। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ पर निशाना साधते हुए सभापति की भूमिका की तुलना अंपायर से करते हुए इसके महत्व को रेखांकित किया और सुझाव दिया कि 'किसी का पक्ष न लें।' सदन में खरगे और धनखड़ के बीच बहस हो गई। सभापति ने कहा वह देश के लिए अपना जीवन बलिदान कर देंगे। मैं किसान का बेटा हूं, कमजोरी नहीं दिखाउंगा। इस पर खरगे ने कहा कि मैं भी मजदूर का बेटा हूं और आपसे ज्यादा चुनौतियों का सामना किया है। शुक्रवार को सदन में उनके और धनखड़ के बीच वाकयुद्ध के बाद खरगे ने विपक्षी नेताओं और सत्तारूढ़ सरकार के नेताओं को बोलने के लिए समय की असमानताओं की ओर इशारा किया। खरगे ने कहा, 'सभापति एक अंपायर हैं और उन्हें किसी का पक्ष नहीं लेना चाहिए। जब सदन के नेता जेपी नड्डा बोलते हैं, तो उन्हें 5-10 मिनट मिलते हैं। दूसरी ओर, हम बोलने का मौका पाने के लिए अपने हाथ ऊपर रखते हैं और हमारे माइक बंद कर दिए जाते हैं।' 10 दिसंबर को राज्यसभा के सभापति के खिलाफ भारतीय ब्लॉक द्वारा पेश किए गए अविश्वास प्रस्ताव के बारे में बोलते हुए खरगे ने कहा कि इसके लिए उन्हें 'पूरी तरह से दोषी ठहराया जा रहा है।'