Monday, 28 Sep 2026

'समृद्ध मध्यप्रदेश @2047' कॉन्क्लेव 24 अगस्त को

भोपाल (22 अगस्त 26)। अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान द्वारा 'कंट्रीब्यूशन ऑफ सेंट्रली फंडेड इंस्टीट्यूशनस फॉर समृद्ध मध्यप्रदेश@2047' विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय कॉन्क्लेव का आयोजन 24 अगस्त 2026 को कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर, भोपाल में किया जाएगा। कॉन्क्लेव की थीम 'वन इंस्टीट्यूट-वन प्रॉमिस' रखी गई है।

कॉन्क्लेव का शुभारंभ 24 अगस्त को सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे। कार्यक्रम में मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल समृद्ध मध्यप्रदेश@2047 पर मुख्य वक्तव्य देंगे। सुशासन संस्थान के उपाध्यक्ष प्रो. राजीव दीक्षित विशेष संबोधन देंगे, जबकि मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. संतोष कुमार विश्वकर्मा द्वारा कॉन्क्लेव की पृष्ठभूमि एवं संदर्भ प्रस्तुत किया जाएगा। दूसरे सत्र में 'इन्क्लूसिव ईकोनोमिक ग्रोथ एण्ड सोसल इंपावरमेंट फॉर समृद्ध मध्यप्रदेश@2047' विषय पर चर्चा एवं आगे की कार्य योजना पर व्यापक विमर्श किया जाएगा। इस चर्चा में उपस्थित केन्द्रीय संस्थाओं के प्रतिनिधि एवं शासन के अधिकारी भाग लेंगे। इस कॉन्क्लेव का उद्देश्य मध्यप्रदेश की विकास प्राथमिकताओं को प्रदेश के अग्रणी केन्द्रीय संस्थानों की शोध एवं नवाचार क्षमता, तकनीकी विशेषज्ञता, आधुनिक अधोसंरचना, एवं मानव संसाधन से जोड़ते हुए भविष्य के लिए संस्थागत साझेदारी का प्रभावी मंच तैयार करना है। इसके माध्यम से केन्द्रीय संस्थानों की विशेषज्ञता को राज्य की वर्तमान विकास चुनौतियों एवं विकास अवधारणा से जोड़कर समाधान विकसित करने पर बल दिया जाएगा।

इस कॉन्क्लेव में प्रदेश में स्थित आईआईटी इंदौर, आईआईएम इंदौर, आईआईएसईआर भोपाल, एमएएनआईटी भोपाल, एम्स भोपाल, आईआईआईटीएस, एनएफएसयू भोपाल, आरआरएसीएटी इंदौर, डीआरडीओ, आईएसआरओ, राष्ट्रीय एवं केन्द्रीय विश्वविद्यालयों सहित कृषि, स्वास्थ्य, प्रौद्योगिकी, प्रबंधन, रक्षा, ऊर्जा, पर्यावरण, कौशल विकास और अन्य क्षेत्रों से जुड़े प्रमुख संस्थान शामिल हैं। इन केन्द्रीय संस्थानों से बेहतर समन्वय के उद्देश्य से राज्य के प्रमुख संस्थानों को भी कॉन्क्लेव में आमंत्रित किया गया है। मुख्य रूप से राज्य में स्थित 59 केन्द्रीय संस्थानों, 26 राज्य स्तरीय विश्वविद्यालयों, 11 राज्य स्तरीय शासकीय इंजीनियरिंग एवं 19 शासकीय मेडिकल महाविद्यालय, 8 राज्य स्तरीय शोध संस्थानों तथा 9 चयनित निजी विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों के आने की सम्भावना है।

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