नागपुर (15 जून 24)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने शुक्रवार को भाजपा के साथ मतभेद की अफवाहों को खारिज कर दिया। इससे पहले पार्टी प्रमुख मोहन भागवत ने लोकसभा चुनाव में भाजपा के बहुमत से चूक जाने के बाद अपने पहले बयान में कहा था कि एक सच्चा सेवक कभी अहंकारी नहीं होता। आरएसएस सूत्रों ने यह जानकारी दी।
आरएसएस सूत्रों ने कहा कि संघ और उसके वैचारिक मार्गदर्शक भाजपा के बीच 'कोई मतभेद नहीं है', जबकि विपक्षी नेताओं सहित लोगों के एक वर्ग ने दावा किया है कि भागवत की टिप्पणी भगवा पार्टी के नेतृत्व या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लक्षित थी। उन्होंने कहा कि ऐसी टिप्पणियां अटकलें हैं और संदर्भ से हटकर कही गई हैं। सोमवार को नागपुर में एक कार्यक्रम में भागवत ने कहा, 'एक सच्चा 'सेवक' मर्यादा बनाए रखता है। वह काम करते समय मर्यादा का पालन करता है। उसे यह अहंकार नहीं होता कि वह कहे कि 'मैंने यह काम किया'। केवल वही व्यक्ति सच्चा 'सेवक' कहलाता है।' जवाब में आरएसएस सूत्रों ने कहा, 'उनके (भागवत) भाषण में 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों के बाद दिए गए भाषण से बहुत अंतर नहीं था। किसी भी संबोधन में राष्ट्रीय चुनाव जैसी महत्वपूर्ण घटना का संदर्भ देना लाजिमी है।'
उन्होंने कहा, 'लेकिन भ्रम पैदा करने के लिए इसका गलत अर्थ निकाला गया और इसे संदर्भ से बाहर ले जाया गया। उनकी 'अहंकार' वाली टिप्पणी कभी भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या किसी भाजपा नेता के लिए नहीं थी।' आरएसएस सूत्रों ने भी अपने राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार द्वारा भाजपा के चुनाव प्रदर्शन को लेकर की गई आलोचना से खुद को अलग कर लिया। एक पदाधिकारी ने कहा कि यह उनकी निजी राय है और यह संगठन के आधिकारिक रुख को नहीं दर्शाता।