जिनेवा (14 सितंबर 24)। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने एमपॉक्स (Mpox) के खिलाफ एक नई वैक्सीन को मंजूरी दे दी है। डब्ल्यूएचओ ने शुक्रवार को इस बात की घोषणा की कि यह वैक्सीन अफ्रीका और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में इस बीमारी से निपटने के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण प्रगति है। नई वैक्सीन का प्राथमिक रूप से वितरण अफ्रीका और उसके आसपास के देशों में किया जाएगा, जहां इस बीमारी की अधिक घटनाएँ देखने को मिल रही हैं। वैक्सीनेशन अभियान के तहत, इस वैक्सीन को पहले उन क्षेत्रों में लागू किया जाएगा जहाँ एमपॉक्स के मामले अधिक हैं, ताकि संक्रमण को नियंत्रण में लाया जा सके और स्वास्थ्य संकट को कम किया जा सके।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस नई वैक्सीन को मंजूरी देते हुए स्पष्ट किया है कि इसे केवल 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के व्यक्तियों को ही दिया जा सकता है। इस वैक्सीन की मदद से एमपॉक्स बीमारी के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी। यह दवा बवेरियन नार्डिक कंपनी द्वारा विकसित की गई है। वर्तमान में इसकी आपूर्ति सीमित है, लेकिन यूनिसेफ और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठन इसे खरीदने में सक्षम होंगे। इसके माध्यम से, वैश्विक स्तर पर एमपॉक्स जैसी जानलेवा बीमारियों की रोकथाम में मदद मिल सकेगी।
डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक, टेड्रोस अघानम घेब्रेयेसस ने कहा कि एमपॉक्स रोधी वैक्सीन की पहली प्री- क्वालिफिकेशन इस बीमारी के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण कदम है। 9 सितंबर को भारत में एमपॉक्स का पहला संदिग्ध मरीज मिला था। विभिन्न राज्य सरकारें इस बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए अभियान चला रही हैं। एमपॉक्स के लक्षणों में सिरदर्द, बुखार, पीठ में दर्द और शरीर पर लाल चकते शामिल हैं। डॉक्टरों का सुझाव है कि यदि बुखार पांच दिन से अधिक समय तक रहता है, तो मास्क पहनें और तुरंत ब्लड टेस्ट करवाएं।