गाजा (20 जनवरी 26)। गाजा में इजरायली सेना की कार्रवाई ने एक बार फिर मानवीय संकट को गहरा कर दिया है। अस्पष्ट सीजफायर लाइन को पार करने के आरोप में इजरायली सैनिकों ने कम से कम 77 फिलिस्तीनियों को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। गाजा के स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि यह रेखा कई स्थानों पर स्पष्ट नहीं है, जिससे लोग अनजाने में उसे पार कर बैठते हैं और उनकी जान चली जाती है। बताया गया है कि यह तथाकथित 'पीली रेखा' उस क्षेत्र को दर्शाती है, जहां से अक्टूबर में सीजफायर के तहत इजरायली सेना पीछे हटी थी। इस रेखा के आसपास रह रहे फिलिस्तीनी भय के माहौल में जी रहे हैं, क्योंकि सेना लगभग रोजाना उन लोगों पर गोलीबारी करती है, जो इस रेखा के पास जाते हैं या गलती से उसे पार कर लेते हैं।
गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, सीजफायर लागू होने के बाद से अब तक 447 फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं। इनमें से कम से कम 77 लोग पीली रेखा के पास इजरायली फायरिंग का शिकार बने, जबकि 77 लोगों की मौत लाइन पार करने के कारण हुई। एसोसिएटेड प्रेस की जांच में सामने आया है कि मृतकों में किशोर और छोटे बच्चे भी शामिल हैं। इजरायली सेना ने सीमा चिन्हित करने के लिए कुछ स्थानों पर पीले बैरल और कंक्रीट बैरियर लगाए हैं, लेकिन कई इलाकों में यह रेखा अब भी बिना किसी निशान के है। वहीं कुछ जगहों पर सीजफायर समझौते के तहत यह सीमा लगभग आधा किलोमीटर तक अंदर रखी गई है, जिससे फिलिस्तीनियों का आरोप है कि इजरायल नियंत्रित क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है।
गाजा सिटी के निवासी अहमद अबू जहांल ने कहा, 'हम पीले बैरलों से दूर रहते हैं। कोई भी उनके पास जाने की हिम्मत नहीं करता।' उन्होंने बताया कि ये निशान उनके घर से केवल 100 मीटर दूर हैं, जबकि इजरायली सेना के नक्शों में दूरी 500 मीटर बताई गई है। इजरायली सेना ने स्वीकार किया है कि मंगलवार तक पीली रेखा के आसपास 57 लोगों को मार दिया गया, और दावा किया कि उनमें से अधिकांश उग्रवादी थे। सेना का कहना है कि सैनिक पहले चेतावनी देते हैं, फिर चेतावनी गोली चलाते हैं, लेकिन कई मामलों में नागरिक मारे गए। इजरायल ने अपनी सेना को एक 7 किलोमीटर गहरे बफर जोन में पीछे हटा लिया है, जिसमें गाजा की अधिकांश उपजाऊ जमीन, ऊंचे इलाके और सभी सीमा क्रॉसिंग शामिल हैं। इसके चलते 20 लाख से अधिक फिलिस्तीनी तटीय और मध्य गाजा में सिमटकर रहने को मजबूर हैं।