मुंबई (06 जुलाई 25)। मुंबई में हुई विजय रैली में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के नेता राज ठाकरे और शिवसेना (उद्धव गुट) के प्रमुख उद्धव ठाकरे लगभग 18 वर्षों बाद एक साथ मंच पर नजर आए। इस दौरान दोनों नेताओं ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और भाजपा पर जमकर हमला बोला। राज ठाकरे ने व्यंग्यपूर्ण अंदाज में कहा कि जो काम शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे नहीं कर पाए, वह फडणवीस ने कर दिखाया और दोनों ठाकरे भाइयों को एक कर दिया। इस टिप्पणी पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तुरंत जवाब दिया। देवेंद्र फडणवीस ने कहा, 'मैं राज ठाकरे का धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने मुझे दोनों ठाकरे भाइयों को जोड़ने का श्रेय दिया, यह मेरे लिए बालासाहेब का आशीर्वाद जैसा है। लेकिन जो सभा हुई, वह विजय रैली नहीं बल्कि रुदाली सभा थी। उसमें मराठी भाषा का जिक्र तक नहीं था, सिर्फ सत्ता की लालसा और शिकायतें थीं।'
फडणवीस ने उद्धव ठाकरे पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पिछले 25 सालों से शिवसेना मुंबई नगर निगम पर शासन कर रही थी, लेकिन उन्होंने मराठी समुदाय के लिए कुछ खास नहीं किया। इसके विपरीत, मोदी सरकार के नेतृत्व में उन्होंने मुंबई के बीडीडी चॉल, पात्रा चॉल और अभ्युदय नगर में मराठी परिवारों को बेहतर घर मुहैया कराए, जिससे मराठी समुदाय को मजबूती मिली है। यह बात शिवसेना को नागवार गुजरी है। मुंबई नगर निगम चुनाव के मद्देनजर एक बार फिर ‘मराठी अस्मिता’ और ‘हिंदुत्व’ की बहस गरमाने लगी है। फडणवीस ने कहा, 'हम मराठी हैं और अपनी भाषा पर गर्व करते हैं, लेकिन साथ ही हम हिंदू भी हैं और अपने हिंदुत्व पर भी उतना ही गर्व करते हैं। हमारा हिंदुत्व सबको साथ लेकर चलने वाला है।' यह बयान आगामी चुनाव में भाजपा की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें हिंदुत्व कार्ड महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।